
जोधपुर. गूगल ने मंगलवार को बालमणि अम्मा को डूडल के जरिए याद किया। अम्मा भारत की जानी-मानी कवयित्री थी। आज उनकी 113वीं जयंती है। गूगल ने एक ग्रामीण जैसे दिखते घर में अम्मा को बैठक कागज पर लिखते हुए डूडल पर उकेरा है। अम्मा ने अपने समय में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उन्हें बेहतर कविता लेखन के लिए सरस्वती सम्मान मिला। बाद में देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया किया। अम्मा की बेटी कमला दास को 1984 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।
केरल में जन्मी थी अम्मा
अम्मा का जन्म केरल राज्य के के त्रिशूर जिले में 1909 में हुआ था। अम्मा ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए कभी स्कूल-कॉलेज नहीं गई। अपने चाचा नलप्पट नारायण मेनन से घर पर ही शिक्षा प्राप्त की।बावजूद उन्होंने भारत के अन्य कवयित्रियों की तरह बुलंदियों को छुआ। केरल में वह बीसवीं सदी की बेहतर कवयित्रियों में से एक है।
पत्रकार से हुई थी शादी
अम्मा की शादी वीएम नायर से 19 साल की उम्र में हुई। वे पेशे से पत्रकार थे जो मलयालम अखबार मातृभूमि के प्रबंध निदेशक व प्रबंध संपादक रहे। उनकी पहली कविता कोप्पुकाई 1930 में प्रकाशित हुई थी। उन्हें कोचीन साम्राज्य के पूर्व शासक परीक्षित थंपुरन से एक प्रतिभाशाली कवि के तौर पर पहचान मिली। थंपुरन ने उनको 'साहित्य निपुण पुरस्कारम' से नवाजा।
लेखन में महिला सशक्तिकरण
अम्मा ने अपनी कविताएं मलयालम में लिखी। शुरुआत में उनकी रचनाओं में महिला सशक्तिकरण झलकता था। पौराणिक पात्रों के अलावा मातृत्व को उन्होंने अपने कविताओं के जरिए लोगों के सामने पेश किया जो काफी सराहा गया। केरल ही नहीं पूरे दक्षिणी भारत में उनको बेहतर कवयित्री के तौर पर जाना गया। अम्मा की कुछ प्रसिद्ध कविताएं हैं- अम्मा (मां), मुथस्सी (दादी), और मज़ुविंते कथा (द स्टोरी ऑफ़ द कुल्हाड़ी) है।