
जोधपुर। बीजेपी हिंदुस्तान की एकमात्र ऐसी निकम्मी और अकर्मण्य सरकार है, जिसने बजट में स्कूल बंद करने की घोषणा की। ये बात मारवाड़ की पूर्व राजमाता कृष्णा कुमारी के निधन पर शोक व्यक्त करने जोधपुर पहुंचे भारत वाहिनी पार्टी के घनश्याम तिवाड़ी ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कही। बीजेपी से हाल ही में किनारा करने वाले तिवाड़ी ने कहा कि जब मैं शिक्षा मंत्री था, तो प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में 22वें पायदान से छठे पायदान पर आ गया था। मेरे शिक्षा मंत्री रहते हुए 1 लाख 18 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। हमने कई कॉलेज खोले, जिससे राजस्थान शिक्षा में अग्रणी हो गया था, लेकिन मेरे जाने के बाद इस बार जब सरकार आई तो बीस हजार प्राइवेट स्कूलों को बंद कर दिया गया। इस सरकार ने बजट में स्कूल बंद करने की घोषणा की, जबकि सब जगह स्कूल खोले जाने की बात कही जाती है। राजस्थान इसीलिए बीमारू राज्य की श्रेणी में है।
किरोड़ी लाल मीणा से किया किनारा
ये पूछने पर कि मीणा भी बीजेपी में थे, तिवाड़ी ने साफ किया कि वे अब बीजेपी में हैं और इसलिए मैं कुछ नहीं कहना चाहता। साथ ही चुनाव के बाद बीजेपी—कांग्रेस से हाथ मिलाने के सवाल पर भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मैं चुनाव के परिणामों को लेकर भविष्यवाणी नहीं कर सकता, लेकिन इतना कह सकता हूं कि भारत वाहिनी पार्टी जनता को एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराएगी।
पेयजल समस्या दूर करने में दोनों सरकारें नाकाम
तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान की कई समस्याएं हैं। सबसे बड़ी पेयजल की परेशानी है, जिसे दूर करने में दोनों सरकारें नाकाम रही हैं। राज्य शिक्षा, चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में देश के तय मानकों से काफी पीछे है। वैसे भी हाल ही में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि राजस्थान जैसे बीमारू राज्यों की वजह से भारत की विकास दर में कमी आ रही है। दोनों दिग्ग्ज पार्टियों ने दस दस साल राज किया। किसी ने कड़ी से कड़ी तो किसी ने लड़ी से लड़ी जोड़ने को कहा। हमने दोनों कर के देखा, फिर भी राजस्थान बीमारू ही रहा।
जाति आधारित राजनीति से दूर
तिवाड़ी ने कहा कि हमारी पार्टी पूरी तरह सामाजिक समरसता और आर्थिक न्याय के पक्ष में है। इसके तहत हम सभी जातियों को मिले हुए आरक्षण का समर्थन करते हैं। हमने ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, कायस्थ, ओबीसी से बचे हुए मुस्लिम और सिंधियों के आरक्षण का बिल भी पेश किया है। हम सामाजिक समरसता और आर्थिक न्याय की लड़ाई लड़ते हैं। हम जाति आधारित लड़ाई के खिलाफ हैं।