जोधपुर

Jodhpur Handicrafts: हैण्डीक्राफ्ट उद्योग पर संकट, खतरे में हजारों कारीगरों-मजदूरों की नौकरी, सरकार से गुहार

Jodhpur Handicraft Industry: जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट उद्योग बीआईएस प्रमाणन की प्रस्तावित अनिवार्यता से नए संकट में घिर गया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि महंगी जांच प्रक्रिया और बढ़ती लागत के कारण छोटे उद्योगों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
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May 07, 2026
Jodhpur Handicrafts
फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट उद्योग को एक्सपोर्ट (निर्यात) के साथ अब घरेलू बाजार में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हैण्डीक्राफ्ट के हर प्रोडक्ट पर बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) प्रमाणन की अनिवार्यता (30 मार्च 2027 से प्रस्तावित) ने विशेष रूप से छोटे और मध्यम हस्तशिल्प उद्योगों के अस्तित्व को संकट में डाल दिया है।

इस अनिवार्यता के तहत हर प्रोडक्ट के लिए बीआईएस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा, जिसमें बीआईएस आवेदन शुल्क, वार्षिक शुल्क, सैंपल परीक्षण और कंसल्टेंसी मिलाकर शुरुआती लागत ही लगभग 3.60 लाख रुपए तक होगी।

10-15 उत्पादों के लिए देने होंगे लाखों रुपए

इस नियम की अनिवार्यता से छोटे एक्सपोर्टर के लिए बीआईएस प्रमाणन प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया है। इसके अलावा प्रत्येक उत्पाद के लिए अलग-अलग जांच अनिवार्य की गई है। जैसे साधारण कुर्सी की जांच लगभग 3.20 लाख रुपए। इसी तरह टेबल की जांच लगभग 2.25 लाख रुपए। ऐसे में यदि किसी इकाई में 10-15 प्रकार के उत्पाद हैं, तो यह लागत लाखों तक पहुंच सकती है, जो छोटे उद्योगों के लिए अव्यवहारिक होगी।

हजारों कारीगर-मजदूर बाजार से बाहर हो जाएंगे

नए नियम का सीधा असर यह होगा कि जोधपुर की हजारों इकाइयां बंद हो जाएंगी। छोटे कारीगर, बढ़ई और मजदूर इस महंगी प्रक्रिया को वहन नहीं कर सकेंगे। ऐसे में वे बाजार से बाहर होकर बेरोजगार हो जाएंगे।

दबाव में उद्योग

  • चीन से आने वाला सस्ता फर्नीचर पहले ही भारतीय बाजार में कीमतों को नीचे दबा रहा है, जिससे छोटे निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो गया है।
  • वैश्विक स्तर पर टैरिफ और व्यापार अनिश्चितता
  • ईरान-इजरायल युद्ध
  • कंटेनर फ्रेट में भारी वृद्धि
  • कच्चे माल की कीमतों में 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

इन सभी परिस्थितियों ने जोधपुर के हस्तशिल्प उद्योग को 'सर्वाइवल मोड' में ला दिया है।

यदि सरकार ने समय रहते इस विषय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो जोधपुर का हस्तशिल्प उद्योग, जो लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है, धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा।

  • भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

बीआईएस प्रमाणन को छोटे उद्योगों के लिए सरल और सस्ता किया जाए। प्रोडक्ट जांच शुल्क में कमी या सब्सिडी दी जाएगी, तो यह उद्योग जिंदा रहेगा।

  • मनीष झंवर, एक्सपोर्टर

इस जांच में समूह प्रमाणन की व्यवस्था लागू की जाए। इससे इस उद्योग से जुड़े लोगों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  • अशोक चौहान, एक्सपोर्टर
Published on:
07 May 2026 07:54 pm