
जोधपुर. रक्त कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसका नाम सुनकर ही भय लगने लगता है। इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं होता है तो यह जानलेवा हो सकती है। लक्षण को पहचानकर सही समय पर उपचार करवाया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती हैं। रक्त कैंसर के कई प्रकार है, जैसे कि ल्यूकेमिया, लिम्फ ोमा, मल्टीपल मायलोमा आदि। लिम्फोमा शरीर के अलग अलग अंगों को प्रभावित करता है। विश्व भर में बुधवार को लिम्फोमा दिवस मनाया जाएगा।
एमडीएम अस्पताल में हिमेटोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. गोविंद पटेल के अनुसार दुनिया भर में लिम्फ ोमा तेजी से फैल रहा है। भारत में लिम्फ ोमा के मामले 5 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहे है। जोधपुर में भी हर साल लिम्फ ोमा के अनुमानित 500 नए मामले सामने आते हैं। इनमें बच्चें व वयस्क भी शामिल हैं। इनमें से करीब दो-तिहाई से अधिक पुरूष होते है।
जानिए, क्या है लिम्फ ोमा
डॉ. पटेल के अनुसार लिम्फ ोमा एक ऐसा रक्त कैंसर है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) में मौजूद संक्रमण से लडऩे वाली कोशिकाओं में उत्पन्न होता है, जिन्हें लिम्फ ोसाइट्स (सफेद रक्त कोशिका का एक प्रकार) कहा जाता है। ये कोशिकाएं लिम्फ नोड्स, बोन मैरो, स्प्लीन (तिल्ली), थायमस और शरीर के अन्य भागों में होती है। लिम्फ ोमा से ग्रस्त लोगों के लिम्फ ोसाइट्स में बदलाव (म्यूटेशन) हो जाता है तथा वे अनियंत्रित गति से बढ़कर एक ठोस ट्यूमर का रूप ले लेती है। लिम्फोमा में से लगभग 85 से 90 प्रतिशत नॉन हॉजकिन लिम्फ ोमा तथा 10 से 15 प्रतिशत हॉजकिन लिम्फ ोमा होते है। नॉन हॉजकिन लिम्फ ोमा किसी भी उम्र में हो सकता ह।ै उम्र के साथ इसका जोखिम बढ़ता है।
लिम्फ ोमा के लक्षण
लिम्फ ोमा के लक्षण वैसे तो आसानी से नजर नहीं आते, लेकिन लिम्फ नोड्स में सूजन या गांठें (आमतौर पर गर्दन, बगल एवं कमर में) तिल्ली व यकृत (लिवर) का बढऩा, लम्बे समय से या बार-बार बुखार, भीषण पसीना, अनायास ही वजन कम होना, भूख में कमी, खांसी और सांस लेने में दिक्कत या सांस का फू लना, खुजली और लगातार थकान महसूस करना आदि लिम्फ ोमा के लक्षणों में शामिल हैं। कैंसर होने के बावजूद लिम्फ ोमा इलाज योग्य हैं। अगर सही समय पर इसके लक्षणों के बारे में पता चल जाए तो कई मामलों में यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है।