जोधपुर

जोधपुर में 238 साल पुराना ठंडाई का बहीखाता, एक मोहल्ले में पीढिय़ां लिख रही बहीखाते में हर साल का हिसाब

इस ठंडाई में भांग नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सौहार्द का मिश्रण है
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Mar 23, 2019
Bookkeeping of 238 years old Thandai in Jodhpur, accounts of the year
जोधपुर में 238 साल पुराना ठंडाई का बहीखाता, एक मोहल्ले में पीढिय़ां लिख रही बहीखाते में हर साल का हिसाब

जोधपुर. शहर के दफ्तरियों का बास मोती चौक खापटा इलाके में 238 सालों से होली स्नेह मिलन के मौके पर स्वादिष्ठ ठंडाई बनती है। इस ठंडाई में भांग नहीं, बल्कि मोहल्ले के सर्व समाजों के आपसी प्रेम और सौहार्द का मिश्रण होता है। बड़ी बात ये हैं कि भीतरी शहर के मोती चौक खापटा में इस आयोजन को मनाने के लिए प्रतिवर्ष खर्च किए गए रुपए का बहीखाता अभी तक मौजूद है, जो 238 साल पुराना है। आयोजन के दिन लोग सुरक्षित बहीखाते को लेकर बैठते है और उसमें ताजा खर्च की गई राशि को अंकित करते हैं। इस कार्यक्रम के लिए शुरुआत में पांच पैसे या उससे भी कम लिए जाते थे, लेकिन आज के दौर में प्रति परिवार 150 रुपए वहन करता है।
इस आयोजन में मोहल्ला छोड़ चुके पुराने लोग अपने वंशजों की परंपरा का निर्वहन करने के लिए देश के विभिन्न कोनों से जोधपुर आते हैं। इसमें यूरोप, जापान, स्पेन व जर्मन रहने वाले मोहल्ले के मूल निवासी लोग भी शरीक होने आते हैं। इसमें ठंडाई, दूध व शक्कर मिलाई जाती है। इसमें मोहल्ले की सभी जाति व धर्मों के लोग अपनी बराबर भागीदारी निभाते हैं। प्रतिवर्ष लगभग 50 से अधिक मोहल्ले के सैकड़ों लोगों के लिए ठंडाई का इंतजाम करते हैं। इस आयोजन में स्वतंत्रता सैनानी बसंत राज मेहता, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुपारस भंडारी, सोहन मेहता, विमल राज सिंघवी, दौलत राठी, नेमीचंद गहलोत, विमलराज सिंघवी सहित प्रबुद्धजनों ने अपनी भागीदारी निभाई।

Updated on:
23 Mar 2019 09:52 pm
Published on:
23 Mar 2019 09:52 pm