जोधपुर

रंग गोष्ठी में रंगकर्म के कई पहलुओं पर गहन विचार मंथन

जोधपुर. जोधपुर थिएटर एसोसिएशन की मेजबानी में चार-दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तहत बुधवार को होटल घूमर के सेमिनार हॉल में बुधवार को रंग संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में कई विचार उभर कर सामने आए।  
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Dec 25, 2019
Brainstorming on many aspects of Dramain Drama seminar
Brainstorming on many aspects of Dramain Drama seminar

जोधपुर. अनुवाद और रूपांतरण दो अलग विधाएं हैं। यह बात प्रख्यात रंगकर्मी, निर्देशक और रूपांतरकार सौरभ श्रीवास्तव ने कही। वे जोधपुर थिएटर एसोसिएशन की मेजबानी में चार-दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तहत बुधवार को होटल घूमर के सेमिनार हॉल में आयोजित ‘नाटकों का रूपान्तरण, आवश्यकता, लेखकीय और निर्देशकीय चुनौतियां ’ रंग गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता उदबोधन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि नाटक के रूपान्तरण में सम्पूर्ण परिवेश और संस्कृति रूपांतरित होती है, जिसमें एक सामाजिक परिवेश को दूसरे सामाजिक परिवेश में ढालना रूपान्तरकार की जिम्मेदारी होती है....। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि रूपान्तरण चाहे किसी भी सूरत में हो, विश्व में मानवीय संवेदनाएं और अनुभूतियां एक सी ही होती हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के चेयरमैन डॉ. अर्जुनदेव चारण ने कहा कि अनुवादक को भाषा, संस्कृति और परिवेश के बारे में पता होना चाहिए। भाषांतर, पाठांतर और रूपांतर अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अनुवाद किसी रचना का पुनर्जन्म होता है, अनुवाद का पहला धर्म ही सहज सम्प्रेषणीयता है जो रचनाकार के मूल भाव को सम्प्रेषित कर सकता है। कमलेश तिवारी के संयोजन में आयोजित रंग गोष्ठी की खुली चर्चा में शब्बीर हुसैन, मदन बोराणा, डॉ. नीतू परिहार, उम्मेद सिंह भाटी, शहजोर अली और आनन्द आदि ने अपनी जिज्ञासाएं प्रकट कीं। थिएटर एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. अनुराधा आडवानी और सचिव डॉ. एस.पी. रंगा ने स्वागत किया। इस अवसर पर कई साहित्यकार और रंगकर्मी मौजूद थे। गुरुवार को रंग गोष्ठी के दौरान ‘कहानी का रंगमंच’ और न्यू वेव थिएटर-थिएटर 2.0 पर चर्चा की जाएगी।

Published on:
25 Dec 2019 06:19 pm