
जोधपुर. देवगुरु बृहस्पति लगभग 13 वर्षों बाद पुन: मंगलवार अल सुबह 5 बजकर 17 मिनट पर वृश्चिक राशि से निकलकर अपनी मूल त्रिकोण राशि धनु में प्रवेश करेंगे। बृहस्पति मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में धनु राशि में प्रवेश करेगा। पं कमलेशकुमार दवे के अनुसार इस समय धनु राशि में शनि व केतु ग्रह भी है और इन पर मंगल की विशेष दृष्टि है। इसलिए यह योग देश-विदेश में राजनीतिक उथल-पुथल कराएगा व देश में युद्ध के हालात पैदा होंगे। दुश्मन देशों पर भारत पहले से ज्यादा प्रभावशाली कार्यवाही करेगा, जिससे विश्व पटल पर भारत की पकड़ और मजबूत होगी। देश-विदेश में तूफान, चक्रवात की स्थिति बनेगी।
धार्मिक आस्थाओं में वृद्धि होगी
दवे के अनुसार गुरु ग्रह के राशि परिवर्तन से सोने, चांदी, जमीन जायदाद के कार्यों में तेजी आएगी। वहीं सेंसेक्स में भी उछाल आएगा। धार्मिक आस्थाओं में भी वृद्धि होगी। इससे धन संबंधी समस्याएं समाप्त होगी। गुरु के धनु राशि में गोचर करने से हंस योग बनता है। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु पुनर्वसु विशाखा व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के भी स्वामी हैं।
मेष व वृश्चिक राशि के लिए श्रेष्ठ फलदायी
जिन जातकों की जन्मकुंडली में गुरु धनु राशि में होकर केन्द्र या त्रिकोण में होंगे उनके लिए हंस योग श्रेष्ठतम फलदाई रहेगा।
बारह राशि के जातकों के लिए इस प्रकार रहेगा बृहस्पति-
- मेष, वृश्चिक के लिए श्रेष्ठ फलदायी।
- वृषभ व मीन धनहानि व चिन्ताकारक।
- मिथुन व सिंह प्रतिष्ठा, मान-सम्मान व सफलता दिलाएगा।
- कर्क, धनु व मकर के लिए शारीरिक कष्ट व मानसिक अशांति।
- कन्या धनहानि व रोग।
- तुला शरीर कष्ट, बीमारी, व्यय।
- कुंभ प्रगतिकारक।
ये रहेगी चाल
20 नवंबर 2020 को मकर राशि में गुरु का गोचर होगा। धनु राशि में गुरु 17 जनवरी से 14 फ रवरी के मध्य अज्व स्थिति में रहेंगे। 14 मई से 13 सितम्बर तक 2020 तक गुरु की चाल वक्री रहेगी। वक्र अवस्था के दौरान भी गुरु 30 मार्च से 30 जून तक मकर राशि में गोचर करेंगे। 29 जून को दोबारा पुन धनु राशि में आकर वक्री होंगे।