जोधपुर

पा लागूं कर जोरी रे , श्याम मो से ना खेलो होरी

  जब देश आजाद हुआ, तब जोधपुर के महिपाल ने की लिखी ठुमरी और स्वर दिए थे लता मंगेशकर ने
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Mar 21, 2021
पा लागूं कर जोरी रे , श्याम मो से ना खेलो होरी
पा लागूं कर जोरी रे , श्याम मो से ना खेलो होरी


जोधपुर. सूर्यनगरी जोधपुर की धरती पर महिपाल जैसे प्रतिभा संपन्न अभिनेता ने जन्म लिया जो एक श्रेष्ठ कलाकार होने के साथ - साथ कोमल अनुभूतियों को व्यक्त करने वाला एक सफल कवि भी रहा है । जोधपुर में जन्मे महिपालचन्द भण्डारी का जन्म 24 नवम्बर 1919 को एक प्रतिष्ठित ओसवाल (जैन) परिवार में हुआ । जोधपुर के जसवंत कॉलेज से उन्होंने बीए पास किया । अपने विद्यार्थी काल से ही वे लेखन, अभिनय, काव्य - रचना में रुचि लेने लगे । जब वे कॉलेज में पढ़ते थे तभी से नाटकों में अभिनय करने तथा पत्र - पत्रिकाओं में लिखने में उनकी रुचि बढ़ गई थी।
जब जोधपुर आए थे जेपी कपूर
सन 1942 में हिन्दी तथा राजस्थानी में साथ - साथ बनने वाली फिल्म नजऱाना के लिए युवा कलाकारों की तलाश में निर्देशक तथा संगीतकार जेपी.कपूर जोधपुर आए । इसी दौरान उनकी नजऱ उभरते कलाकार महिपाल पर पड़ी तो उन्हें अपनी तलाश पूरी होती दिखाई दी । मारवाड़ी युवक को अपनी मातृभाषा की पहली फिल्म में अभिनय का अवसर मिल गया। लेकिन माया- नगरी मुम्बई में बिना संघर्ष सफलता इतनी आसां नहीं थी। महिपाल को उनकी काव्य - प्रतिभा ने ही फिल्मों में अवसर मिलना शुरू हुआ।
वी . शान्ताराम की फिल्मों के लिए लिखे गीत
वर्ष 1943 में उन्होंने प्रसिद्ध निर्माता वी . शान्ताराम की चार फिल्मों के लिए गीत लिखना आरम्भ कर दिया । जब गीत लिखे तो उन्हें अनुमान भी नहीं था कि 1947 में बनी फिल्म आपकी सेवा में प्रयुक्त उनका लिखा गीत पा लागूं कर जोरी रे , श्याम मो से ना खेलो होरी ( ठुमरी ) को स्वर लता मंगेशकर ने दिए थे। गीत लिखने के साथ - साथ उन्हें छोटी छोटी भूमिकाएं भी मिलने लगीं । सौम्य , सुदर्शन चेहरा तथा कोमल वाणी युक्त मोहक व्यक्तित्व के कारण पौराणिक फिल्मों में सर्वाधिक मौका मिला। पचास के दशक में उनकी प्रमुख नायिकाओं में अनीता गुहा तथा निरूपा राय रही। नवरंग सहित लगभग 140 फिल्मों में अभिनय का जलवा बिखेरने वाले महिपाल का निधन 15 मई 2005 को 86 वर्ष की उम्र में हुआ था।

Published on:
21 Mar 2021 12:05 pm