
जोधपुर. सिविल एयरपोर्ट विस्तार के लिए लंबे समय से रक्षा मंत्रालय और नगर निगम के बीच चली आ रही खींचतान को राज्य कैबिनेट ने मंजूरी देते हुए ख़त्म कर दिया है। नगर निगम एयरपोर्ट विस्तार के लिए 69 एकड़ भूमि देगा और इसके एवज में रक्षा मंत्रालय को 93 करोड़ 77 लाख रुपए चुकाने होंगे। राज्य के मुख्य सचिव डी.बी गुप्ता ने मंत्रिमंडल की आज्ञा परिपत्र जारी कर इस बारे में जानकारी दी है।
जोधपुर के सिविल एयरपोर्ट को पिछले कई सालों से विस्तार की दरकार है। एयरफोर्स के उपयोग में आने से यहां फ्लाइट टाइमिंग और संख्या भी निर्धारित है। आसपास जमीन उपलब्ध नहीं होने से यह विस्तार लंबे समय से अटका हुआ था। नगर निगम की पिछले कार्यकाल में एयरपोर्ट विस्तार के लिए भूमि निशुल्क उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन अधिक भूमि की मांग एयरफोर्स और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से की गई।
नगर निगम ने इस भूमि को उपलब्ध करवाने के लिए हामी भरी लेकिन इस बार सशुल्क यह जमीन दी जानी थी। इस जमीन की दरों को लेकर लंबे समय से रक्षा मंत्रालय और नगर निगम के बीच विवाद चल रहा था। पिछले साल दोनों के बीच एमओयू साइन हुआ और वित्त विभाग ने 6 अगस्त 2019 को अधिसूचना जारी कर इस राशि की वसूली करने को कहा था। जिसे राज्य कैबिनेट ने भी सरकुलेशन के माध्यम से मंजूरी दे दी है।
पहले भी 37 एकड़ जमीन
इससे पहले नगर निगम ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए 37 एकड़ जमीन रक्षा मंत्रालय को निशुल्क उपलब्ध करवाई थी। इसीलिए इस बार भी 69 एकड़ जमीन को भी मंत्रालय निशुल्क या रियायती दर पर लेने की कोशिश कर रहा था। लेकिन नगर निगम कमजोर राजकोष होने के कारण इसे निशुल्क नहीं देने पर अड़ा रहा। इस पर वित्त विभाग और कैबिनेट के हस्तक्षेप के बाद 93 करोड़ 77 लाख रुपए देना तय हुआ है।
केवल 3 फ्लाइट की पार्किंग
वर्तमान में जोधपुर एयरपोर्ट पर केवल 3 फ्लाइट ही पार्क हो सकती हैं। हालांकि एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। जिसके बाद तकरीबन 7 जहाज खड़े हो सकेंगे। अधिक संख्या में पार्किंग होने से जोधपुर एयरपोर्ट पर एयरलाइंस कंपनियां अधिक फ्लाइट का संचालन कर सकेगी। पर्यटन सीजन होने की वजह से वर्तमान में तो इस फ्लाइट का संचालन किया जा रहा है। लेकिन मार्च के बाद यह संख्या घटकर तीन चार फ्लाइट तक आ जाती हैं। जिसके कारण जोधपुर से मेट्रो शहरों की कनेक्टिविटी कम हो जाती है। एयरपोर्ट विस्तार होने से शहर में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।