
जोधपुर. बाड़मेर जिले में पचपदरा थानान्तर्गत भाण्डियावास गांव के पास भिड़ंत के ट्रेलर-बस में आग से मृत 12 में से 11 शवों की शिनाख्त होने में कम से कम तीन से चार दिन लग सकते हैं। उसके बाद ही शव संबंधित परिजन को सुपुर्द किए जा सकेंगे और फिर अंतिम संस्कार हो पाएगा। तब तक यह कंकाल महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में ही रहेंगे।
हादसे में मृत एक मासूम बच्ची व दस अन्य व्यक्तियों के कंकाल बुधवार शाम महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी लाए गए थे। बस में सवार यात्रियों के गायब होने वाले परिजन को भी मोर्चरी बुलाया गया था, जहां देर रात तक सैम्पल जुटाए गए। प्रत्येक कंकाल की बोन यानि हड्डियों का सैम्पल लिया गया। वहीं, इनसे मिलान के लिए ब्लड रिलेशन वालों के रक्त नमूने लिए गए। देर रात तक प्रक्रिया पूरी हो पाई। रात को ही सभी सैम्पल सडक़ मार्ग से जयपुर की विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिए गए, जहां गुरुवार सुबह जमा कराए गए।
प्राथमिकता : अवकाश के दिन भी होगा मिलान कार्य
कंकाल में तब्दील हो चुके ग्यारह शवों की जल्द से जल्द शिनाख्त और फिर अंतिम संस्कार हो सके इसके लिए डीएनए मिलान का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से शुरू किया गया है। प्रयोगशाला में चौबीस घंटे कार्य होगा। अवकाश के दिन भी डीएनए मिलान किया जाएगा। जैसे-जैसे मिलान होता जाएगा वैसे-वैसे जांच रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
शिनाख्त होने पर ही परिजन को होंगे सुपुर्द
अभी यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि 11 कंकाल किन-किनके हैं। इसलिए बाड़मेर जिला प्रशासन ने बस में सवार होने के बाद मिसिंग यात्रियों की सूची जारी की है। इन सभी के परिजन के डीएनए जांच के लिए नमूने लिए गए हैं। जांच पूरी होने पर ही पता लग सकेगा कि कौन सा कंकाल किसका है। फिर उसे परिजन को सुपुर्द किया जाएगा।
सर्वोच्च प्राथमिकता से प्रक्रिया शुरू
‘डीएनए से मिलान के लिए सभी नमूने मिल गए हैं। सर्वोच्च प्राथमिकता से प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है। परिजन के रक्त का कंकाल के बोन से मिलान में कुछ समय लगता है। यदि खून से खून का डीएनए मिलान करना होता तो समय कम लगता। डीएनए मिलान होने में कम से कम तीन से चार दिन लगेंगे। संभवत: सोमवार तक डीएनए मिलान होने की उम्मीद है।’
अजय शर्मा, डायरेक्टर, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) जयपुर।