
- केन्द्र में मोदी सरकार के चार साल
जोधपुर .
भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र में सरकार को चार साल पूरे हो चुके हैं। बीजेपी-कांग्रेस दोनों अपने नजरिये से कार्यकाल को देख रही है। सत्ता पक्ष जहां जश्न मना रहा है तो वहीं विपक्ष इसे विश्वासघात बता रहा है। राजस्थान और खास तौर पर जोधपुर को चंद सौगातें मिली हैं। लेकिन वहीं बात केन्द्र सरकार की योजनाओं की हो तो प्रदर्शन औसत ही कहा जा सकता है। केन्द्र सरकार की एेसी योजनाएं हैं जिनमें गिनाने के लिए जोधपुर के खाते में कोई काम नहीं है। जोधपुर को मिली सौगातों और केन्द्र सरकार की योजनाओं को लेकर रिपोर्ट।
इन सौगातों का दावा
१. एयरपोर्ट का विस्तार और अपग्रेडेशन - जोधपुर एयरपोर्ट का विस्तार जो कि पिछले कई सालों से अटका हुआ था वह शुरू हुआ है। पहले चरण का काम पूरा होने के कगार पर है। लेकिन पिछले तीन माह से बजरी की उपलब्धता नहीं होने के कारण यह काम अटका हुआ है। इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट में कुल तीन चरण का काम होना है। इसके बाद यहां प्रतिदिन की उड़ानों की संख्या भी बढ़ सकेगी।
२. एम्स का विस्तार - बीजेपी सरकार का दाव है कि कांग्रेस ने सिर्फ घोषणा कर औपचारिक तौर पर एम्स को शुरू करवाया। जबकि बीजेपी की केन्द्र सरकार ने इसके लिए प्रयास किए। ४५० करोड़ रुपए एम्स के लिए स्वीकृत हुए। साथ ही १०० बैड का अस्पताल भी शुरू करवाया। अब दावा है कि इसको आगे अपगे्रड करने का काम भी किया जाएगा।
३. रेलवे स्टेशन की सुविधाएं - रेलवे स्टेशन को आकर्षक चित्रकारी के साथ ही एस्केलेटर जैसी सुविधाएं देकर अपग्रेड किया गया है। ४ नई ट्रेनों की सौगात के साथ ही कई ट्रेनों का ठहराव भी किया गया है। कुछ ही समय में एक ओर ट्रेन का ठहराव भी हो सकेगा। साथ ही जिले के अन्य स्टेशन पर भी ट्रेनों के ठहराव के प्रयास किए जा रहे हैं।
४. छह नए नेशनल हाईवे - जिले की सरहद से जुड़े छह नए नेशनल हाईवे स्वीकृत किए गए हैं। केन्द्र सरकार का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इसके अलावा जोधपुर से बर तक ११ सौ करोड़ रुपए की लागत से नेशनल हाइवे को फोरलेन करने का काम शुरू हो गया है।
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सरकारी योजनाओं में एेसे पिछड़े हैं हम
१. स्वच्छ भारत अभियान - मोदी सरकार का सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट और योजना है। प्रत्येक गांव और जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। लेकिन जोधपुर जिला जो कि अब तक ओडीएफ घोषित नहीं हुआ है उसका स्वच्छता सर्वेक्षण में भी कोई बेहतर स्थान नहीं है। पिछले सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग ४३४ शहरों में २०९वीं थी। इस बार भी अब तक सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ शहरों में जोधपुर का नाम नहीं है।
३. सभी गांवों में बिजली - प्रधानमंत्री मोदी ने हालही में एक कार्यक्रम के दौरान नारा दिया कि देश के सभी गांव अब बिजली से जुड़ चुके हैं। लेकिन सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का दूसरा पक्ष यह भी है कि कई ढाणियां और मकान अब भी एेसे हैं जहां आज तक बल्ब नहीं जला हो। अकेले जोधपुर जिले में एेसे १८ हजार मकान हैं और १०० से अधिक ढाणियां हैं जो बिजली से महरूम हैं।
३. उद्योग के बुरे हालात - मेक इन इंडिया का नारा देकर उद्योगों को नए आयाम तक पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जीएसटी का सबसे बुरा असर छोटे उद्यमियों पर पड़ा है। हालांकि इसका दूरगामी लाभ बाद में नजर आ सकता है, लेकिन जोधपुर शहर के स्टील और टैक्सटाइल उद्योग इससे सर्वाधिक पीडि़त है। हैंडीक्राफ्ट में कई प्रकार की वृक्ष लकडि़यों की अनुपलब्धता से यह उद्योग भी प्रभावित हुआ है।
४. सब को मकान - सभी को मकान देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना लॉच की गई थी। इस योजना में वर्ष २०१८-१९ का जो लक्ष्य रखा गया है वह ४७१७ मकान बनाने का है। लेकिन अब तक सिर्फ ३० लोगों को ही प्रथम किश्त जारी की गई है। वहीं पिछले दो साल में २० हजार मकान जिले में स्वीकृत हुए। इनमें से ८ हजार अब तक लंबित है।
इनका कहना...
चार साल में एेसी योजनाएं जो कांग्रेस सरकार में रुकी हुई थी उनको अंजाम तक पहुंचाया है। प्रयास कर रहे हैं कि अब जो एक साल बचा है उसमें जो प्रोजेक्ट जोधपुर में चल रहे हैं उनको भी पूरा किया जाए।
- गजेन्द्रसिंह शेखावत, सांसद एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री।