जोधपुर

हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग को झटका, सरकार ने निर्यातकों के लिए की नई ड्यूटी ड्रॉ बैक रेट की घोषणा

आम बजट से पहले शहर के हस्तशिल्प निर्यात उद्योग को ड्यूटी ड्रॉ बैक के रूप में मिलने वाले प्रोत्साहन की उम्मीद को झटका लगा है। वित्त मंत्रालय के रेवेन्यू विभाग की ओर से 29 जनवरी को जारी की गई ड्रॉ बैक रेट लिस्ट में ग्लास आर्टवेयर को छोडकऱ किसी भी धातु पर ड्रॉ बैक नहीं बढ़ाया है।
2 min read
central government announced new duty drawback rates for exporters
हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग को झटका, सरकार ने निर्यातकों के लिए की नई ड्यूटी ड्रॉ बैक रेट की घोषणा

अमित दवे/जोधपुर. आम बजट से पहले शहर के हस्तशिल्प निर्यात उद्योग को ड्यूटी ड्रॉ बैक के रूप में मिलने वाले प्रोत्साहन की उम्मीद को झटका लगा है। वित्त मंत्रालय के रेवेन्यू विभाग की ओर से 29 जनवरी को जारी की गई ड्रॉ बैक रेट लिस्ट में ग्लास आर्टवेयर को छोडकऱ किसी भी धातु पर ड्रॉ बैक नहीं बढ़ाया है।

ग्लास आर्टवेयर पर ड्रॉ बैक 2.2 से बढ़ाकर 4.8 फीसदी कर दी गई है। जोधपुर में सबसे अधिक निर्यात होने वाले आर्टिस्टिक हैन्डक्राफ्टेड फ र्नीचर पर पहले के अनुसार केवल 1.3 फीसदी ड्रॉ बैक रखा गया है। जबकि जीएसटी लगने से पहले आर्टिस्टिक हैण्डीक्राफ्ट फर्नीचर पर 5 प्रतिशत ड्यूटी ड्रॉ बैक मिलता था। जोधपुर से कुल हैण्डीक्राफ्ट का 80 प्रतिशत वुडन आर्टिस्टिक हैण्डीक्राफ्ट फर्नीचर आयटम्स है।

सरकार की ओर से विदेशी मुद्रा अर्जित करवाने के लिए कुल निर्यात राशि पर रिएम्बर्स देकर निर्यातक को ड्यूटी ड्रॉ बैक के रूप में प्रोत्साहन दिया जाता है। एक्सपोर्ट प्रमोशन कांउसिल फॉर हैण्डीक्राफ्ट्स व जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने हैण्डीक्राफ्ट्स प्रोडक्ट के लिए केंद्र सरकार की ड्रॉ बैक कमेटी से दरें बढ़ाने की मांग की थी।

धातु हस्तशिल्प-- ड्यूटी ड्रॉ बैक दर (प्रतिशत में)
ईपीएनएस वेयर- 2.2
आयरन आर्टवेयर- 1.6
ब्रास आर्टवेयर- 2.2
कॉपर आर्टवेयर- 2.2
एल्यूमिनियम- 1.5
वुडन हैडीक्राफ्ट- 1.9
ग्लास आर्टवेयर- 4.8

एमइआइएस बंद होगी 31 मार्च से
सरकार पहले ही निर्यातकों को प्रोत्साहन रूपी मर्चेन्डाइस एक्सपोट्र्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमइआइएस) 31 मार्च से बन्द करने की घोषणा कर चुकी है। इसकी जगह कोई नई प्रोत्साहन स्कीम की घोषणा या ड्रॉ बैक की दर में बढोतरी नहीं की गई है। इससे आने वाले समय में हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

ड्रॉ बैक की संशोधित दरों का हैण्डीक्राफ्ट के निर्यातकों को इंतजार था। सभी इसके बढऩे की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन ड्रॉ बैक समिति ने कांच की कलाकृतियों को छोडकऱ अधिकांश हस्तकला वस्तुओं के लिए ड्रॉ बैक दरें समान ही रखी है।
- राकेश कुमार, महानिदेशक, इपीसीएच

ड्यूटी ड्रॉ बैक की संशोधित दरें देरी से घोषित हुई है। हैण्डीक्राफ्ट उद्योग देश में लाखों लोगों को रोजगार व विदेशी मुद्रा अर्जित करवाता है। ड्रॉ बैक पहले ही कम है। मंदी व सुस्त अर्थव्यवस्था के कारण निर्यातकों की समस्या बढ़ती जा रही है।
- डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

Published on:
05 Feb 2020 02:04 pm