
जोधपुर. प्रत्यक्ष कर के लंबित विवादों के निपटारे के लिए केंद्रीय बजट में ‘विवाद से विश्वास’ योजना की घोषणा के साथ ही आयकर विभाग के अधिकारियों पर मामलों का जल्द निस्तारण कर अटका हुआ पैसा निकालने का दबाब पडऩे लगा है। आर्थिक संकट से जूझ रही केंद्र सरकार ने विभाग को 31 मार्च तक दो लाख करोड़ रुपए संग्रहण का लक्ष्य दिया है। जोधपुर आयकर रेंज में ही प्रत्यक्ष कर के 4225 लंबित मामलों में लगभग 900 करोड़ रुपए फंसे हैं।
विभागीय अधिकारी योजना के सहारे मामलों का सलटारा कर अधिकाधिक राशि निकालने की कवायद में जुटे हैं। ‘विवाद से विश्वास’ योजना के तहत करदाता बिना ब्याज व पेनल्टी चुकाए टैक्स राशि अदा कर लंबित विवादों का निपटारा कर सकेंगे। इसके लिए अपीलों में लंबित आयकर मामलों को सूचीबद्ध कर करदाताओं को तलब कर योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कई लंबित प्रकरणों में पक्षकारों को नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।
सोर्स नहीं बताने वालों को भी मौका
नोटबंदी के दौरान बैंकों में कैश जमा कराने और इस आय का सोर्स नहीं बता पाने वालों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा। आयकर विभाग ने ऐसे कई लोगों की बैंकों में जमा करवाई गई ऐसी रकम को कर योग्य माना था और करदाताओं ने इसके खिलाफ अपीलें लगा रखी है। ऐसे करदाताओं में ही जोधपुर रेंज के करीब 250 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं।
देश में 9.32 लाख करोड़ का टैक्स विवाद
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 4.83 लाख डायरेक्ट टैक्स विवाद है। इनकी कुल राशि करीब 9.32 लाख करोड़ रुपए है। इस समय प्रत्यक्ष कर के लगभग चार लाख 83 मामले अपील के विभिन्न फोरम कमिश्नर अपील, आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल के साथ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
31 मार्च के बाद 10 प्रतिशत ब्याज
योजना के प्रावधान के अनुसार यदि आयकरदाता 31 मार्च तक की कर अदा नहीं कर पाता है तो 30 जून तक उसे एक और मौका मिलेगा। लेकिन उसे 10 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। ब्याज और पेनल्टी के विवाद में आयकरदाता को 31 मार्च तक विवादित रकम के 25 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसके बाद यह राशि 30 प्रतिशत हो जाएगी।