
केस-1-- देवनगर पुलिस थाने में फरवरी में एक महिला ने अपने खाते से अज्ञात द्वारा 98 हजार रुपए निकालने की एफआइआर दर्ज करवाई। दरअसल महिला केक बनाकर ऑनलाइन बिक्री करती है। खरीददार ने उसे भुगतान के लिए क्यूआर कोड भेजा और उसके खाते से पैसे निकल गए।
केस-2-- खाण्डा फलसा थानान्तर्गत रहने वाले एक महिला ने अपने बेटे की पुरानी साइकिल बेचने के लिए ओएलक्स पर डाली। खरीददार ने साइकिल खरीद के भुगतान के लिए वाट्सएप पर क्यूआर कोड भेजा और स्कैन करते ही 8 हजार रुपए खाते से निकल गए।
केस- 3-- शास्त्रीनगर पुलिस थाने में एक व्यक्ति ने एफआइआर दर्ज करवाई कि गूगल पे के जरिए क्यूआर कोड स्कैन करने पर 20 हजार रुपए क्रेडिट की बजाय डेबिट हो गए।
केस- 4--रातानाडा पुलिस थाने की एफआइआर के अनुसार फोन-पे एप पर क्यूआर कोड स्कैन करने पर उसके खाते से 75 हजार रुपए निकल गए, जबकि उसने भी सामने वाले से भुगतान लेने के लिए क्यूआर कोड स्कैन किया था।
जोधपुर. हैकर्स और ऑनलाइन ठगी करने वालों ने अब क्यूआर कोड के जरिए लूट का खेल शुरू कर दिया है। पिछले दो महीने में शहर के चार पुलिस थानों में चार एफआइआर दर्ज की गई है। सभी एफआइआर में व्यक्तियों ने पैसे प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन किया था, जबकि उनके स्वयं के बैंक खाते से पैसे निकल गए।
दरअसल क्यूआर कोड का इस्तेमाल केवल पैसे देने (भुगतान) के लिए होता है लेने (प्राप्ति) के लिए नहीं। लोग बिजनेस करने के दौरान सामान खरीदने वालों से ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करने के लिए उनके द्वारा वाट्सएप अथवा अन्य माध्यम से भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन कर लेते हैं। ऐसे में खरीददार द्वारा तय राशि से बनाए गए क्यूआर कोड के जरिए विक्रेताओं के बैंक खाते से पैसे डेबिट हो जाते हैंं। विशेष बात यह है कि खरीददार बना हैकर्स दो बार क्यूआर कोड भेजकर दो बार ठगी करता है। पहली बार में ठगी के बाद वह दूसरी बार यह कहते हुए क्यूआर कोड पुन: भेजता है कि पहली बार उसने गलत भेज दिया था और लोगों के खाते से दो बार पैसे निकल जाते हैं।
पुलिस की बजाय पहले बैंक पहुंचे
बैंक खाते से पैसे निकलते ही मोबाइल पर एसएमएस आता है तब लोगों को मालूम चलता है कि उनके खाते से किसी ने पैसे निकाल लिए हैं। लोग मामला दर्ज करवाने के लिए पुलिस थाने पहुंचते हैं। अगर पैसे निकलने के 30 से 60 मिनट के दरम्यान अपनी बैंक पहुंचकर अथवा कॉल करके भुगतान होल्ड करने के लिए कहा जाए तो संभवत: बैंक डेबिट राशि को वापस क्रेडिट कर सकती है और आप ठगी का शिकार होने बच सकते हैं।
क्या है क्यूआर कोड
क्यूआर कोड में किसी भी बैंक खाताधारक की बैंकिंग विवरण की डिजिटल सूचना होती है। खाता संख्या सहित अन्य विवरण छिपाने के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता है।
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‘क्यूआर कोड से पैसे केवल डेबिट होते हैं। पैसे प्राप्त करने के लिए उसे स्कैन नहीं करना चाहिए। अगर ऐसा हो जाए तो जितना जल्दी हो बैंक को सूचित करना चाहिए।’
- प्रिया सांखला, साइबर एक्सपर्ट