
जोधपुर. किराणा, सब्जी और दूध जैसी दैनिक जरूरतों का सामान के साथ ऐसे लोग जो आपकी मेडिकल इमरजेंसी में काम आते हैं उन्हें कैसे भुलाया जा सकता है। शहर में ऐसे ही कई मेडिकल शॉप और स्वयंसेवी संगठन हैं जो कि फोन पर दवाइयों की पर्ची लेकर घरों तक दवाइयां पहुंचा रहे हैं। बुजुर्गों के लिए लाइफ सेविंग ड्रग ही जीने का आधार है। ऐसे में आज हम संकट के इन साथियों को सलाम कर रहे हैं।
अधिकारी-कर्मचारी खुद जुटे
औषधि नियंत्रण अधिकारी आशीष गज्जा और पंकज गहलोत प्रतिदिन सौ लोगों तक दवाइयों की डिलीवरी कर रहे हैं। इसके अलावा पास जारी किए हुए केमिस्ट पांच सौ से अधिक दवाइयां लोगों के निकटतम मेडिकल स्टोर व घरों तक पहुंचा रहे हैं। हालांकि तय प्लानिंग अनुसार सौ से अधिक पास केमिस्टों को दिए गए हैं, लेकिन कई कफ्र्यूग्रस्त इलाकों में केमिस्ट को पुलिस द्वारा रोके जाने के कारण दवा बीमारों तक समय पर नहीं पहुंच पा रही है। इन दिनों विभाग के पंकज गहलोत, आशीष गज्जा, संदीप व्यास सुबह 6 बजे अपना घर छोड़ते हैं और रात के 10 बजे तक लोगों को इमरजेंसी में दवा पहुंचा रहे हैं। सुखराम पाल ने बताया कि वे अपनी दुकान से दस किलोमीटर तक के क्षेत्र में दवा पहुंचा रहे हैं।
ताकि भीतरी शहर में तकलीफ न हो
शहर के नायों का बड़ में मनोज जोशी दवाइयों की दुकान संचालित करते हैं। शहर का भीतरी क्षेत्र पूरी तरह से सील है। ऐसे में लोगों को दवाइयां पहुंचाने में काफी परेशानी होती है। लेकिन मनोज प्रयास करते हैं हर किसी को इमरजेंसी का सामना न करना पड़े। जो दुकान तक पहुंचने में समर्थ नहीं उनसे फोन पर लेकर दवाइयां पहुंचाई जाती है।
खतरा उठाकर हर क्षेत्र तक जाते हैं
शास्त्री नगर एच सेक्टर के समीप नितेश टाक व देव दुकान संचालित करते हैं। यहां एमडीएम के समीप होने के कारण नियमित काफी लोग आते हैं। लेकिन यह उन चुनिंदा दुकानों में से हैं जिनको कफ्र्यूग्रस्त क्षेत्र में भी दवा सप्लाई की स्वीकृति मिली है। ऐसे में फोन पर दवा पर्ची लेकर सप्लाई करते हैं। खतरा उठाकर संक्रमित क्षेत्रों में भी लोगों के घरों तक दवाई पहुंचाते हैं। वे बताते हैं रास्ते में कई जगह पुलिसकर्मी आगे जाने नहीं देते, इसलिए परेशानी भी आती है।
बना अतिरिक्त चार्ज के घर तक पहुंचा रहे दवाइयां
मेडिकल स्टोर संचालक संदीप बोथरा ने बताया रोजाना 60 से 100 घरों तक स्टॉफ के दीपक चौधरी व अशोक विश्नोई के जरिए घर तक दवाइयां पहुंचा रहे है। वर्तमान स्थिति में लोगों को दवाइयां नहीं होने के कारण परेशान न होना पड़े। उन्होंने बताया उनके साथ टीम में भाई कुलदीप बोथरा, सिद्धार्थ पारख, कैलाश विश्नोई, जसराज कंसारा, मोहित गौड़ भी दुकान पर कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे है।