
विकास चौधरी/जोधपुर. दसवीं चौपासनी रोड पर हाजी बिल्डिंग के पास स्थित क्लिनिक के चिकित्सक ने गर्भवती महिला को जांच के बाद गर्भवती न बताकर माहवारी शुरू करने की दवा दे दी। इससे तबीयत बिगडऩे पर महिला को उम्मेद अस्पताल ले जाया गया। वहां प्रसव के दौरान गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई। पीडि़त ने कथित महिला चिकित्सक के खिलाफ सरदारपुरा थाने में लिखित शिकायत दी, लेकिन दस दिन बाद भी एफआइआर दर्ज नहीं हुई। शंकरनगर निवासी अंकित मीरचंदानी के अनुसार पत्नी हिना को माहवारी न होने पर गत 11 अक्टूबर को दसवीं चौपासनी रोड पर हाजी बिल्डिंग के पास क्लिनिक में कथित महिला चिकित्सक से जांच कराई थी।
महिला चिकित्सक ने पत्नी के गर्भवती न होने की जानकारी दी और कहा कि हार्मोंस की वजह से माहवारी नहीं हो रही है। कथित चिकित्सक ने महिला को दवाएं दे दी। इसके तीन दिन बाद 13 अक्टूबर को महिला की तबीयत और खराब हो गई। अंकित पत्नी को क्लिनिक पर ले गया। वह बंद था तो फोन पर कथित चिकित्सक से बात की। उसने रविवार का अवकाश बता किसी अन्य चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी।
अंकित ने एक अन्य महिला चिकित्सक से पत्नी की जांच कराई तो उसने हिना को छह माह का गर्भ होने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि पहले वाली कथित चिकित्सक की दवाओं से गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचा है। चिकित्सक ने इंजेक्शन लगाया और गर्भवती को उम्मेद अस्पताल भेज दिया, जहां डॉ रेखा जाखड़ ने जांच कर उसे भर्ती किया। प्रसव में मृत शिशु का जन्म हुआ।
व्यवसायी अंकित का कहना है कि कथित चिकित्सक की लापरवाही व गलत दवाओं की वजह से पत्नी की तबीयत बिगड़ी और गर्भ में शिशु की मृत्यु हुई है। कथित चिकित्सक के खिलाफ महिला की ओर से एक नवम्बर को सरदारपुरा थाने में एफआइआर दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत दी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। थानाधिकारी लिखमाराम का कहना है कि शिकायत को परिवाद दर्ज कर जांच में रखा गया है। कार्रवाई की जाएगी।
जान से मारने की धमकियां
अंकित ने बताया कि लापरवाही के बारे में कथित चिकित्सक को अवगत कराया गया। गलती मानने की बजाय झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी। कोई कार्रवाई करने पर दो युवकों ने भी उसे धमकियां दी।