
वीडियो : एसके मुन्ना/जोधपुर. नवरात्र के पहले दिन 2008 में भगदड़ मचने से 216 लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना जोधपुर के इतिहास में एक गहरी छाप छोड़ गई है। इस हादसे के सालों बीतने के बाद भी इसके घाव आज भी मृतकों के परिजनों के जीवन में हरे हैं। आज जब इस संबंध में चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने को लेकर सरकार मना कर रही है और हाईकोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में इसे मांगा है तो परिजनों ने रिपोर्ट को लेकर अपने विचार साझा किए हैं।
उल्लेखनीय है कि हादसे के बाद पुलिस ने एक मर्ग दर्ज किया था और किसी की कोई अन्य रिपोर्ट नहीं ली थी। सरकार ने जांच के लिए जस्टिस जसराज चोपड़ा का अयोग बनाया था। हादसे के बाद तत्कालीन एसपी-कलक्टर के तबादले किए गए। इसके बाद आयोग की कारवाई लगभग 1500 दिन चली थी। 222 पीडि़तों और 59 अफसरों के बयान लिए थे। प्रदेश के सभी मंदिरों का दौरा किया गया था। यात्राओं पर 3.23 लाख, वेतन पर 105.27लाख, चिकित्सा पर 1.75लाख, गाडिय़ों के किराए पर 18.60 लाख और रॉयल्टी के 32.93 लाख मिलाकर कुल दो करोड़ रुपए खर्च हुए थे।