
जोधपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लोकतंत्र में दोनों ही साथ चलते हैं और जो दोनों को स्वीकार कर लेता है वही लोकतंत्र का सिपाही कहलाता है। गहलोत शुक्रवार को जोधपुर में थे और कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। गहलोत ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कमला नेहरु महिला महाविद्यालय के छात्रसंघ कार्यालय के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार की स्वस्थ आलोचना राजद्रोह नहीं हो सकती। कार्यक्रम में गहलोत को बताया गया कि केएन कॉलेज में 5 हजार छात्राएं हैं, लेकिन समारोह में बहुत कम छात्राएं उपस्थित थी। कारण बताया गया कि पुलिस वालों ने कई छात्राओं को बाहर ही रोक दिया है। इस पर गहलोत ने मंच से कहा कि लोग सोच रहे हैं कि यहां भी बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति चल रही है। पुलिस वाले डरे हुए हैं। कहीं बीजेपी ने लड़कियां भेज दी और नारेबाजी कर दी तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।
यह लोकतंत्र है। विरोध, धरना-प्रदर्शन का अर्थ यह नहीं कि उन पर फायरिंग और लाठीचार्ज कर दी जाए। देश में 70 सालों तक लोकतंत्र सुरक्षित रहा है। अब तो मुझे लोकतंत्र की चिंता हो रही है। जाने आगे क्या होगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि पाकिस्तान की औकात क्या है। कुछ लोग बार-बार पाक का नाम लेकर उसका महत्व बढ़ाते हैं। बार-बार पाक चले जाने की बात कहते हैं। मंच पर करीब 38 मिनट तक दिए अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बार-बार पाकिस्तान का नाम लेकर केवल देश के ध्रुवीकरण की बात की जा रही है। भारत में यह सब नहीं चलता। यहां जनता जनार्दन है और वही फैसला करती है।
असम में खुद की सरकार, फिर भी लागू नहीं कर पाए एनआरसी
गहलोत ने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर कहा कि असम में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद वे वहां एनआरसी लागू नहीं कर पाई। इसके उलट वह पूरे देश में इसको थोपने की बात कह रही है।
अमित शाह पर ली चुटकी
गहलोत ने मंच से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर चुटकी लेते हुए कहा कि वे आज जोधपुर में है। उनकी सीआईडी यहां भी लगी हुई होगी। अशोक गहलोत क्या-क्या बोला है। उनको तुरंत सूचना पहुंच जाएगी।
ऐसी क्या नौबत आई कि पीएम को सीएए, एनआरसी को लेकर सफाई देनी पड़ रही
उधर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ऐसी क्या नौबत आ गई कि अब उनको नागरिक संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) आदि को लेकर सफाई देनी पड़ रही है। वे जनता को समझाने के लिए पूरे मुल्क में नेताओं को भेज रहे हैं। गहलोत ने कहा कि नागरिक संशोधन कानून (सीएए) का देश में चौतरफा विरोध हो रहा है, फिर भी केन्द्र सरकार इसे लागू करने पर तुली हुई है।