चुने हुए जनप्रतिनिधियों और अफसरों पर सरकार जता रही अविश्वास
जोधपुर . देश में चलाए जा रहे स्व'छता सर्वेक्षण में पिछडऩे के बाद राÓय सरकार ने इसमें बदलाव किया है। इस बार सरकार ने स्व'छता सर्वेक्षण-2018 से पहले ही सफाई की कमान निकाय प्रमुखों से छीनकर जिला कलक्टरों के हाथों में सौंप दी है। सफाई की रैकिंग में प्रदेश को ऊपर लाने के लिए यह बदलाव किया गया है।
उल्लेखनीय है कि 2017 की स्व'छता रैंकिंग में राजस्थान का एक भी शहर 100 शहरों की सूची में नहीं था। प्रदेश की रैकिंग 171 बूंदी से शुरू हो रही थी और राजधानी जयपुर का नंबर 215वें नंबर पर था। राÓय सरकार ने इस बार निकायों के आला अफसरों और जन प्रतिनिधियों पर विश्वास नहीं जताते हुए कलक्टरों को स्व'छता सर्वेक्षण अभियान में शामिल किया है। इतना ही नहीं, वार्डों में सफाई की मॉनिटरिंग भी आरएएस अधिकारी करेंगे।
नुमाईंदों-निकाय अफसरों पर नहीं विश्वास
यूं तो सफाई का जिम्मा निकाय ही संभालते हैं, क्योंकि कर्मचारियों से लेकर संसाधन सभी इनके पास होते हैं। प्रदेश के कुछ बड़े निकायों में आईएएस अफसरों के पास कमान है और यहां आरएएस अधिकारी भी लगे हुए हैं। अधिकतर निकायों में बोर्ड भाजपा के पास हैं, जहां उनके प्रतिनिधि महत्वपूर्ण पद पर काबिज हैं। इसके बावजूद निकायों से सफाई की कमान कलक्टरों को दे दी गई है।
निकाय प्रमुख ही संभालते रहे कमान
प्रदेश में अब तक निकाय के आला अफसर ही सफाई की कमान संभालते आए हैं। सफाई, रोडलाईट, सीवरेज सहित शहर के विकास का जिम्मा निकायों के पास ही होता है। पिछली बार सरकार ने अपने स्तर पर सफाई में अव्वल रहने वाले निकाय प्रमुखों को सम्मानित भी किया था।
जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है सरकार
लोकल बॉडीज में चुने हुए प्रतिनिधि आते हैं और नीचे पूरा एडमिनिस्ट्रेशन है। इनकी जिम्मेदारी है कि शहर में सफाई, बिजली, सीवरेज आदि का ध्यान रखें। सरकार का अपने ही जनप्रतिनिधियों और निकायों के अफसरों से विश्वास उठ गया है। ऐसे में क्या जिला कलक्टर सफाई का सारा कार्य कर लेगा, क्योंकि संसाधन तो सारे लोकल बॉडीज के पास होते हैं। इस सरकार को कुछ काम नहीं करना है। यह सरकार सिर्फ कागजों के अंदर बेतुकी जिम्मेदारियां देने का कार्य कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है।
रामेश्वर डूडी, नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस