
जोधपुर। लोकसभा चुनाव में गाय का मुद्दा इतना बड़ा नहीं है जितना पिछले विधानसभा चुनाव में था। लेकिन एक गाय के मालिकाना हक को लेकर बड़ा विवाद शुक्रवार को फिर से गरमा गया। जोधपुर की एक अदालत में इस बेजुबान गाय की पेशी हुई। अतिरिक्त महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन की अदालत में गाय को पेश किया। गाय पर सरकारी विभागों में कार्यरत दो व्यक्ति अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। एक बिजली विभाग में कांस्टेबल हैं जबकि दूसरे सरकारी शिक्षक।
पुलिस गाय को गाड़ी में लेकर आई
मंडोर पुलिस थाना के एएसआइ शुक्रवार सुबह 11.45 बजे मंडोर स्थित पन्नालाल गोशाला से गाय को एक लोडिंग गाड़ी में बैठाकर न्यायालय परिसर में लेकर आए।
9 माह पुराना हैं मामला
चेनपुरा बावड़ी स्थित नयाबास निवासी शिक्षक श्यामसिंह परिहार के अनुसार उनकी गाय पिछले डेढ़ दो महीने से लापता थी। गत 31 जुलाई 2018 को स्कूल से लौटते वक्त उन्हें खुद की गाय रास्ते में नजर आई तो वे उसे घर लाकर बांध दी। 4 दिन बाद यानि 4 अगस्त को उनके पड़ोस में रहने वाले डिस्काम में सिपाही पद पर तैनात ओमाराम विश्नोई ने परिहार के घर पर बंधी गाय को यह कहकर ले गए कि यह गाय उसकी है।
दोनों के बीच में गाय को लेकर ठन गई और दोनों ने मालिकाना हक़ जताना शुरू कर दिया। दोनों के बीच गाय को लेकर जबरदस्त कहासुनी हुई और पूरे परिवार के लोग तथा मोहल्ले के लोग भी इस मामले में कूद पड़े। इस बीच शिक्षक ने कांस्टेबल ओमाराम पर मारपीट करने का आरोप लगाया। बात पुलिस तक पहुंच गया।
पुलिस ने मालिकाना हक को लेकर जांच शुरू की। श्याम सिंह ने कहा कि गाय खुद का दूध पीती है जबकि ओमाराम ने कहा कि गाय की एक बछड़ी है वह खुद का दूध नहीं पीती। इत्तफ़ाक से उस वक्त गाय दूध नहीं दे रही थी इसलिए पीने या नहीं पीने का फैसला नहीं हो सका। गाय के दुधारू होने तक पुलिस ने गाय को पन्नालाल गौशाला भेज दिया था
और शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया।