
जोधपुर. विगत दो दशकों से भी अधिक समय से महिला पीजी महाविद्यालय जोधपुर में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय बोहरा (कायरा भा) पार्थिव देह का अंत्येष्टि कर्म जैसा सेवा कार्य कर रहे हैं। बोहरा कोरोना महामारी में पहले दिन से लेकर दूसरी लहर में अब तक 600 से अधिक संक्रमित शवों का अन्तिम संस्कार कर चुके हैं। कई बार ऐसी भी स्थिति उनके सामने आई जब शव मात्र एक व्यक्ति के साथ एम्बुलेंस में अद्र्ध रात्रि में मोक्ष धाम पहुंचा और फ ोन पर सूचना मिलते ही वे अंत्येष्टी के लिए पहुंचे थे।
वे मानते हैं कि सतर्क रहने में और डरने में फ र्क है। यदि आप सतर्क रहकर किसी भी कर्म को करते हैं तो आपका डर स्वत: ही खत्म हो जाता है। स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है कि व्यायाम, प्राणायाम और योग और हवन करें, जो कई रोगों से रक्षा और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकता है। अब तक 50 से अधिक बार रक्तदान कर चुके संजय ने बताया कि 20 वर्ष की उम्र में जालप मोहल्ला निवासी बद्री पुरोहित के साथ पूर्ण विधि-विधान से अंत्येष्टि कर्म को समझा और तब से अनवरत सेवा कार्य जारी है। कोविड की दूसरी लहर में किसी भी तरह के डर के बारे में पूछने पर संजय कहते हैं कि माता-पिता का आशीर्वाद और ईश्वर में पूर्ण विश्वास सारे भय खत्म कर देता है। प्रति वर्ष संस्कार शिविर के माध्यम से युवाओं को वेद अध्ययन, साफ ा बान्धना और अंत्येष्टि कर्म की विधि भी सिखाते हैं।