जोधपुर

बजरी व अन्य खनिजों के खनन पट्टों के अस्तित्व पर संकट

-पर्यावरणीय स्वीकृति लेने की प्रक्रिया हुई जटिल -प्रदेशभर में लागू हुई नई व्यवस्था
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Mar 15, 2019
jodhpur
बजरी व अन्य खनिजों के खनन पट्टों के अस्तित्व पर संकट

जोधपुर।

प्रदेश के बजरी व अन्य खनिजों के खनन व्यवसायियों, खनन पट्टाधारकों व नई खान आवंटन करने वाले आवेदकों को खनन पट्टों के अस्तित्व में लाने व उन्हें स्वीकृत कराने में पसीने छूट सकते है। इसकी वजह खनन पट्टों के लिए ली जाने वाली पर्यावरणीय स्वीकृति (इसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया है। हाल ही में, 4 मार्च को खान विभाग ने विभाग की ओर से पट्टाधारकों को जारी होने वाले मंशा पत्र में पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए 5 हैक्टेयर से अधिक वाले प्रारूप में स्टेट एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी (सिया) से आवेदन करने के आदेश किए है। विभाग के अतिरिक्त निदेशक पर्यावरण व विकास ने प्रदेश के सभी अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए है। सरकार के इस आदेश से निर्माणाधीन सरकारी प्रोजेक्ट भी प्रभावित होंगे।पूर्व में खनन पट्टों व शॉर्ट टर्म परमिट (एसटीपी) को इसी लेने के लिए जिला स्तरीय कमेटी से ही आवेदन करना होता था और सामान्य आवेदन करने पर इसी जारी हो जाती थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जिला स्तरीय कमेटी में विशेषज्ञ नहीं होने के कारण इस कमेटी द्वारा जारी की जाने वाली इसी पर रोक लगा दी। एनजीटी द्वारा रोक लगाने के बाद पर्यावरण और वन मंत्रालय (एमओइएफ) द्वारा इसी जारी करने के लिए किसी प्रकार गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। इस वजह से खानधारकों व एसटीपी आवेदकों की मुश्किलें बढ़ेंगी।

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जटिल हुई प्रक्रिया

सरकार के इस आदेश से खानधारको व एसटीपी आवेदकों की दुविधा बढ़ गई है। अब सिया कमेटी से इसी प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल होगी। सिया कमेटी में इसी के लिए आवेदन करने पर पहले टोकन जारी होता है। उन सबको कैटेगरी बी में मान लिया जाता है। टोकन जारी होने के बाद इसी जारी होने में करीब 1 साल का समय लग जाता है

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राजस्व प्रभावित व अवैध खनन को मिलेगा बढ़ावा

सरकार के इस नए आदेश से बजरी सहित अन्य खनिजों के खनन पट्टों की स्वीकृति में समय लगेगा। इससे राज्य सरकार को होने वाला राजस्व प्रभावित होगा। साथ ही, खनन पट्टों की स्वीकृति में देरी होने से अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा और सरकार को अवैध खनन पर लगाम लगाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

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सरकारी प्रोजेक्ट के लिए एसटीपी लेनी पड़ती है। एसटीपी लेने के लिए इसी की समस्या आ रही है। इसी की नई प्रक्रिया से कार्य प्रभावित होंगे।

अश्विनी व्यास,कांट्रेक्टर 'ए श्रेणी

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प्रदेश के सभी खानधारकों को इसी के लिए आवेदन करने पर राज्य स्तरीय कमेटी सिया कमेटी पर भार बढ़ेगा। इसी देरी से जारी होने के साथ अवैध खनन बढ़ेगा।

महेन्द्र बोहरा, खनन मामलों के जानकार

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सरकार का आदेश है। प्रदेशभर के खनन संबंधित विभिन्न मामलों में सिया कमेटी से पर्यावरणीय स्वीकृति जारी होगी, इससे कमेटी पर भार बढ़ेगा व आवेदकों को भी पर्यावरणीय स्वीकृति जारी होने में समय लगेगा।
श्रीकृष्ण शर्मा, माइनिंग इंजीनियर
जोधपुर

Published on:
15 Mar 2019 06:34 pm