
Dates Palm Crisis: जोधपुर. पश्चिमी राजस्थान का अगला प्रमुख फल खजूर होगा। केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने खजूर लगाने के 8 साल बाद फल सूखाने का प्रोटोकॉल विकसित किया है। पहली बार कुल फसल का 15 प्रतिशत सूखाया जाएगा। तकनीक सफल रही तो अगले साल पूरी फसल को ही ड्राई किया जाएगा। इससे 10 दिन में खराब होने वाला खूजर एक साल तक चल सकेगा। कीमत भी दोगुनी मिलेगी। किसान अन्य राज्यों के साथ विदेश में भी खूजर का निर्यात कर सकेंगे।
अरब देशों में खजूर की खेती के सामने जलवायविक चुनौती आने से अगले एक डेढ़ दशक में थार का मरुस्थल खजूर की नई राजधानी के रूप में उभरने की संभावना है। वर्तमान में पूरे विश्व का 67 प्रतिशत खूजर अरब देशों में होता है, लेकिन बीते एक दशक से मानवीय दखल, मवेशियों की संख्या बढ़ने, कीड़े लगने से खजूर का क्षेत्रफल घटता जा रहा है। इस दौरान खजूर की फसल में 30 प्रतिशत की कमी आई है। मिश्र में रेड पाम विविल कीड़ा खजूर की फसल का नष्ट कर रहा है। अफ्रीकी देश खजूर में फंगस से जूझ रहे हैं।
अरब मेें खजूर आसान, थार में इतना नहीं
काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अकथ सिंह ने बताया कि खजूर का पेड़ तेज धूप में जबकि जड़े पानी में रहती है। अरब में खजूर इसलिए अधिक समय तक रह पाता है, क्योंकि वहां सितम्बर-अक्टूबर में बरसात शुरू होती है तब तक पेड़ पर ही खजूर पक जाता है। थार में जून-जुलाई में बारिश शुरू हो जाती है। एक बार बारिश गिरते ही 25 से 30 फीसदी फल सड़ जाता है।
एक पेड़ पर 10-12 गुच्छे
गुजरात के आनंद विश्वविद्यालय ने सितंबर 2014 में काजरी को खजूर की एडीपी-1 वैरायटी के 156 पौधे दिए थे, जो अब आठ साल के हो गए हैं। खजूर का पौधा 50 साल तक रहता है। इस साल एक पौधे पर खजूर के 10-12 गुच्छे ही रखे गए हैं, जिससे गुच्छों की साइज 7-8 किलो से बढक़र 14-15 किलो हो गई है। एक पौधे से 100 किलो तक खजूर प्राप्त हो जाते हैं।
अरब देश में खजूर के सामने कई चुनौतियां आ रही है। आने वाले समय में काजरी का अगला बेर खजूर साबित होगा।
- डॉ. ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर