हाईकोर्ट ने चिकित्सा सचिव, पेंशन विभाग व जिला प्रशासन नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में किया जवाब तलब
भंवरी की हत्या के सात साल बाद भी जारी नहीं हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र
हाईकोर्ट ने चिकित्सा सचिव, पेंशन विभाग व जिला प्रशासन नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में किया जवाब तलब - मृत्यु प्रमाण-पत्र के अभाव में ग्रेच्युटी, जीपीएफ बीमा पारिवारिक पेंशन नहीं मिली
जोधपुर . एएनएम भंवरी अपहरण व हत्या से जुड़े मामले में शुक्रवार को जस्टिस अरुण भंसाली की अदालत में सुनवाई हुई। मृतक भंवरी के पुत्र साहिल व पुत्रियों अश्विनी व सुहानी ने याचिका दायर करते हुए कहा कि चिकित्सा विभाग उनकी माता एएनएम भंवरी के सेवा उपरांत परिलाभ, जैसे ग्रेच्युटी, जीपीएफ, राज्य बीमा, एलआईसी व पारिवारिक पेंशन आदि का भुगतान इसलिए नहीं कर रही है कि जिला प्रशासन उनकी माता का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहा है।अधिवक्ता यशपाल खिलेरी के माध्यम से दायर याचिका की सुनवाई में जस्टिस भंसाली ने जिला प्रशासन, चिकित्सा विभाग के सचिव व पेंशन विभाग को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब तलब किया है। सुनवाई में अधिवक्ता खिलेरी ने कहा कि एक ओर एएनएम भंवरी का अपहरण व 1 सितम्बर 2011 को हत्या मानकर सात साल से एससी एसटी कोर्ट में 16 आरोपियों पर हत्या का मुकदमा चल रहा है। इसी आधार पर एएनएम भंवरी के पुत्र साहिल को अनुकंपा पर नौकरी प्रदान कर दी गई है, लेकिन भंवरी की दो पुत्रियों सहित पुत्र को भंवरी की सेवा उपरांत परिलाभ से इसलिए वंचित किया जा रहा है कि जिला प्रशासन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहा। मृतक भंवरी के पुत्र साहिल व पुत्रियों अश्विनी व सुहानी ने कहा कि जिला कलक्टर ने इसके लिए आवेदन करने पर एसडीएम बिलाड़ा को अधिकृत कर दिया था, लेकिन तकनीकी कारणों से एसडीएम ने तहसीलदार पीपाड़सिटी को आवेदन भेज दिया। तहसीलदार ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि भंवरीदेवी कीं मृत्यु या शव बोरूंदा में होने अथवा अंतिम संस्कार होने के साक्ष्य नहीं हैं।