
जोधपुर।
मारवाड़ में फुंगी के नाम से मशहूर मशरूम नए व्यवसाय के रूप में उभरकर सामने आया है। आमजन व घरों में सामान्य रूप से कम काम में लिया जाने वाला मशरूम रेस्टोरेंट्स, होटलों आदि में स्पेशल रेसिपी के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। वहीं युवा वर्ग को यह नए व्यवसाय के रूप में आकर्षित कर रहा है। जोधपुर में भी यह मशरूम की खेती व्यवसायिक तौर पर की जा रही है। मशरूम अपने विशिष्ट पौष्टिक व औषधीय गुणों के कारण प्रचलित है। इस कारण कोरोना के बाद मशरूम की मांग बढ़ी है। मशरूम में विटामिन डी, प्रोटीन व सेलेनियम होता है। जिसके सेवन से शरीर में प्राकृतिक रूप से रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है जो कि कोरोना से लडऩे में सहायक होती है
---
गेहूं के भूसे पर उगाया जाता है
मशरूम को कृषि अवशेष (गेहूं के भूसे ) पर उगाया जाता है। इसको उगाने के लिए खेत की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए बंद कमरों की आवश्यकता होती है और इसके 15 से 35 डिग्री तापमान उपयुक्त होता है व 80 प्रतिशत नमी की आवश्यकता होती है।
---
अब बीज जोधपुर में ही उपलब्ध
मशरूम को उगाने के लिए बीज, जिन्हें स्पॉन कहते है, की आवश्यकता होती है जो कि प्रयोगशाला में तैयार किया जाता है। पहले स्पॉन उदयपुर से खरीदकर लाना पड़ता था, अभी हाल ही में जोधपुर में ही एक युवा किसान जितेंद्रसिंह सांखला ने लैब स्थापित की है, जहां सभी प्रकार के स्पॉन उपलब्ध हो जाते है।
----
भारत में तीन वैरायटी ज्यादा प्रचलित
जोधपुर में 15-20 लोग मशरूम की खेती कर रहे है। इनमें से 4-5 बड़े पैमाने पर कर रहे है, ये लोग हर सीजन में मशरूम उत्पादन कर रहे है। एक बैग में करीब 800 ग्राम मशरूम निकलता है, कई लोगों के एक हजार बैग्स में उत्पादन हो रहा है। मशरूम की 15 से ज्यादा वैरायटी प्रचलन में है, लेकिन भारत में बटन मशरूम, मिल्की मशरूम, आयस्टर मशरूम ज्यादा प्रचलन में है। जोधपुर में भी इन तीनों वैरायटियों का ही उत्पादन किया जा रहा है।
---
जोधपुर में मशरूम की अच्छी मांग है, जिसके कारण यह 250-300 प्रति किलो के भाव से बिकती है। मांग को देखते हुए युवा व किसान इसमें रुचि दिखा रहे है।
जितेन्द्रसिंह सांखला,
मशरूम उत्पाद किसान