
जोधपुर. कहीं बनारस की रंग-बिरंगी साडिय़ां तो कहीं पूर्वांचल की मशहूर मधुबनी वस्त्रों की भरमार। कुछ ऐसे ही रंग बिरंगे उत्पाद शहर में बिकने के लिए आए हैं। दरअसल इन दिनों केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय व राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम लिमिटेड के तत्वावधान में पाली रोड स्थित अरबन हाट में 8 से 21 फरवरी तक आयोजित स्पेशल हैंडलूम एक्सपो में भारत के विभिन्न राज्यों से आए हस्तशिल्प व हथकरघा कारीगर अपनी आर्ट कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों की आकर्षक डिजाइन के एक से बढकऱ हस्तशिल्प उत्पाद मिल रहे हैं। जो ग्राहकों को लुभा रहे हैं। ऐसे में यदि आप भी भारत के विभिन्न राज्यों के उत्पाद एक ही छत के नीचे खरीदने की चाह रखते हैं तो यह मेला आपके लिए ही है। यहां आपको न सिर्फ अन्य राज्यों की संस्कृति से जुड़े परिधानों को खरीदने का मौका मिलेगा, बल्कि रियायती दाम में इन वस्त्रों को खरीदकर घर ला सकते हैं।
भागलपुर का मशहूर सिल्क
यदि आप सिल्क की साडिय़ों को खरीदने में रूचि रखते हैं तो मेले में भारत का सिल्क शहर कहे जाने वाले भागलपुर के रेशम व सिल्क से बने वस्त्रों की भरमार है। यहां पर स्टॉल लगाने भागलपुर से आए मोहम्मद फिरोज ने बताया कि यहां की साडिय़ां कुकुन के धागों से तैयार की जाती है। जो पर्यावरण के लिए अनुकूल होती हैं। पहनने में आरामदायक होने के साथ ही इनकी चमक लम्बे समय तक बरकरार रहती है। यही वजह है कि महिलाओं को इस साड़ी को खरीदने में विशेष उत्साह नजर आ रहा है।
1 हजार से लेकर 16 हजार तक की साडिय़ां
मेले में 1 हजार से लेकर 16 हजार तक की साडिय़ां व आकर्षक कारीगरी के वस्त्र मिल रहे हैं। इसमें बनारसी सूट के साथ जामदानी वर्क के सूट संग रेशम के आकर्षक दुपट्टे भी मिल रहे हैं। इसके अलावा बिहार का प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग सहित झारखंड, राजस्थान के ट्रैडिशनल हैंडमेड आइटम मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं। मिट्टी के बर्तन, मार्बल पर कारीगरी, तोरण, कुशन कवर, टैपिस्ट्री सहित बाड़मेर जैसलमेर का प्रिंट एवं आर्ट वर्क की स्टॉल भी यहां पर ग्राहकों को लुभाने के लिए तैयार हैं।
डिजिटल पेंमेंट पर दी जा रही छूट
मेले में आने वाले ग्राहकों को लुभाने व डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल पेमेंट पर आकर्षक छूट भी दी जा रही है। इस पर मिलने वाले कैशबैक के चलते भी ग्राहक हस्तशिल्प उत्पाद खरीदने में रूचि दिखा रहे हैं। मेले में खरीदारी करने आई झालामंड की रहने वाली सुनिता ने बताया कि वो मूल रूप से बिहार की है। यहां पर लगी स्टॉल से मिल रहे हथकरघा उत्पादों की खरीदारी की। मेले में वर्तमान में लगभग 40 स्टॉल सजी हैं। इसमें पारम्परिक राजस्थानी आर्ट वर्क की स्टॉल भी शामिल हैं।