जोधपुर

जमीन पर ही मार दी गई टिड्डी की पहली पीढ़ी, भारत में टिड्डी के खात्मे पर यूएनओ की मोहर

locust news - लाल सागर के दोनों ओर खाड़ी देशों में अब खतरा- पूर्वी अफ्रीकी देशों में भी कम हुई टिड्डी
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जमीन पर ही मार दी गई टिड्डी की पहली पीढ़ी, भारत में टिड्डी के खात्मे पर यूएनओ की मोहर
जमीन पर ही मार दी गई टिड्डी की पहली पीढ़ी, भारत में टिड्डी के खात्मे पर यूएनओ की मोहर

जोधपुर. इस साल भारत में टिड्डी की पहली पीढ़ी पैदा नहीं हो सकी। अण्डे देने के बाद जमीन से निकले हॉपर्स को टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) और कृषि विभाग की टीमों ने सफलतापूर्वक मारकर खरीफ की फसल को पूरा बचा लिया।
दो दिन पहले संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ओर से जारी बुलेटिन में टिड्डी को पूरी तरह से खत्म बताया है। सितम्बर के दूसरे सप्ताह में न तो वयस्क टिड्डी और न ही उसके हॉपर्स कहीं रिपोर्ट किए गए हैं। अब लाल सागर के दोनों ओर बसे देशों में टिड्डी का खतरा है। वहां समुद्र के किनारे सऊदी अरब और यमन अधिक हो गई है। यमन में टिड्डी बेकाबू है। इस्लाम के पवित्र स्थल मक्का में भी टिड्डी दल परेशान कर रहे हैं। अफ्रीकी देशों ईथोपिया में भी कई जगह टिड्डी मर चुकी है। केन्या व सोमालिया भी थोड़ी बहुत टिड्डी शेष रही है।

पिछले साल सितम्बर में 70 हैंड हेल्ड टीमें उतारनी पड़ी, 1000 करोड़ का नुकसान
पिछले साल सितम्बर में इन दिनों टिड्डी का भयंकर प्रकोप हो गया था तब केंद्र सरकार को 70 अतिरक्त टीमें हैंड हेल्ड मशीनों के साथ मैदान में उतारी पड़ी। टिड्डी नवम्बर महीने तक परेशान करती रही और कई जगह खरीफ की फसल को नष्ट कर दिया था। राजस्थान में 1000 करोड़ रुपए का फसल खराबा हुआ था।

पाकिस्तान में भी मामूली टिड्डी
इस साल भारत में टिड्डी खात्में एक बड़ी वजह पड़ौसी देश पाकिस्तान द्वारा किए गए प्रयास भी है। यहां वर्तमान में कराची के लास्बेला और सिंध के दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में मामूली ब्रीडिंग हो रही है। इस साल पाकिस्तान से भारत में 102 दल आए थे। पिछले करीब महीने भर से टिड्डी दल नहीं आ रहे हैं।

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‘हमने सारे ऑपरेशन्स बंद कर दिए हैं। फिलहाल टिड्डी कहीं नहीं है। अब केवल सर्वे पर ध्यान है।’
-डॉ केएल गुर्जर, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर

Published on:
13 Sept 2020 10:00 pm