
जोधपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार अपने गृहनगर आ रहे हैं। चुनाव से पहले एक बयान उन्होंने दिया था कि ‘मेरे कारण जोधपुर वालों को परेशानी हुई, उपेक्षा हुई। समय आने पर जोधपुर का मान-सम्मान लौटाऊंगा।’ विधानसभा चुनाव के परिणाम आए जोधपुर ने कांग्रेस को 7 सीटें दी। मुख्यमंत्री पद की कमान गहलोत ने तीसरी बार संभाली है। सीएम का पदभार संभालने के बाद अब पहली बार अपने गृहनगर आ रहे हैं तो इस शहर को उनसे कई उम्मीदें हैं। उनके पिछले कार्यकाल में शुरू किए गए कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो पांच साल से अटके पड़े हैं। कई ऐसी मांगें हैं जो खुद गहलोत विपक्ष में रहते हुए जोधपुर के लिए उठाते रहे हैं। अब इन मांगों के पूरा होने की उम्मीद जगी है।
पेश है खास रिपोट...
1. पानी स्टोरेज क्षमता बढ़ाना : प्रतिवर्ष इंदिरा गांधी नहर में क्लोजर के कारण करीब एक माह तक पेयजल सप्लाई प्रभावित होती है। पानी की समस्या के स्थाई समाधान के लिए जोधपुर में स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की मांग है। यदि अधिक स्टोरेज क्षमता शहर में होती है तो क्लोजर के दिनों में भी शहर व ग्रामीण क्षेत्र को पीने के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
2. एलिवेटेड रोड :शहर की सबसे ज्वलंत समस्याओं में से एक प्रमुख सडक़ों पर जाम लगना है। पहले मंडोर से आखलिया सर्किल तक एलिवेटेड रोड प्रस्तावित की गई थी। लेकिन कोई काम आगे नहीं बढ़ा। अब एक बार फिर एक हजार करोड़ का प्रस्ताव बनाकर जेडीए ने भेजा है। इस बार पावटा से आखलिया सर्किल तक यह सडक़ प्रस्तावित की गई है। उम्मीद है इस बार इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिले।
3. वर्कऑर्डर हुए, पर काम नहीं : पिछली सरकार के समय विकास कार्यों के वर्कऑर्डर हुए लेकिन उनके कार्य अब तक रुके हुए हैं। हेरिटेज पाथ इसी का एक उदाहरण है। 2 करोड़ की लागत का यह हेरिटेज पाथ जेडीए को बनवाना है। लेकिन बिना किसी उचित कारण के इस काम को रोका गया है। जबकि भीतरी शहर में पर्यटन को देखते हुए यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
4. रोडवेज-मंडी प्रकरण का निस्तारण : पिछली कांग्रेस सरकार के समय इस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई। रोडवेज बस स्टैंड का विस्तार करना है। इसके लिए पावटा सब्जी मंडी को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना है। पिछले पांच साल में इसकी कोई खास प्रगति नहीं हुई। मंडी आज भी पुराने स्थान पर ही संचालित हो रही है। मंडी के छोटे व्यापारियों के लिए कोई नीति ही नहीं बनी है।
5. स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकास :केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना में जोधपुर को शामिल नहीं किया गया। इसके बाद एक सैन्य कार्यक्रम में शिरकत करने जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जोधपुर आए तो गहलोत ने स्मार्ट सिटी की मांग रखी थी। यह मांग भले ही पूरी नहीं हुई लेकिन अब जोधपुरवासियों को उम्मीद है कि स्मार्ट सिटी की तर्ज पर ही जोधपुर का विकास होगा। इसी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को जोधपुर लगाया भी गया है।
6. मजबूत बिजली सिस्टम : बिजली सिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए 765 केवी जीएसएस की मांग जोधपुर कर चुका है। इसके लिए प्रस्ताव बन रहे हैं। एक हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट से जोधपुर ही नहीं बल्कि पूरा पश्चिमी राजस्थान लाभान्वित होगा। रिफाइनरी प्रोजेक्ट के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस प्रस्ताव को मंजूरी और जल्द जमीन आवंटन की मांग जोधपुरवासी कर रहे हैं।
7. सुविधाओं को तरसती आवासीय योजनाएं :जोधपुर विकास प्राधिकरण ने कई आवासीय योजनाएं लॉन्च की, लेकिन वहां अभी भी मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं। बहुप्रतिक्षित विवेक विहार योजना के अलावा राजीव गांधी आवासीय योजना, सुंदरसिंह भंडारी आवासीय योजना सहित मुख्यमंत्री जन आवास की कई योजनाएं हैं जहां आमजन का रहवास नहीं हो पाया है। इनमें से कई योजनाएं तो पूरी ही नहीं हो पा रही है। नगर निगम की प्रथम आवासीय योजना गांधी नगर भी अब तक विकसित नहीं हो सकी है।
8. अब तो शुरू हो ओपीडी ब्लॉक : महात्मा गांधी अस्पताल की नई ओपीडी विंग पिछले कई सालों से शुरू होने का इंतजार कर रही है। सबसे पुराना व शहर के मध्य अस्पताल होने के कारण यहां मरीजों की आउटडोर संख्या भी ज्यादा रहती है। 2011 में कांग्रेस सरकार के समय ही इसका काम शुरू हुआ। 2014 में पूरा भी होना था। लेकिन अब तक इस विंग का काम अधर में अटका हुआ है।
9. नई सडक़ मल्टीलेवल पार्र्किंग : सरदारपुरा में अंडरग्राउंड मल्टीलेवल पार्र्किंग विकसित करने के बाद नई सडक़ पार्र्किंग स्थल का काम शुरू करने की मांग शहरवासी कर रहे हैं। भीतरी शहर के बाजार में पार्र्किंग समस्या के समाधान के लिए यह बड़ा प्रोजेक्ट है। पुलिस व नगर निगम के बीच विवाद में फंसे इस प्रोजेक्ट पर अब न्यायालय ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई डीपीआर के साथ काम पूरा होने की उम्मीद है।
10. औद्योगिक विकास :रिफाइनरी को देखते हुए जोधपुर-बालोतरा को संयुक्त रूप से विकसित करने का प्लान है। इसके तहत जोधपुर नए औद्योगिक क्षेत्रों की मांग कर रहा है। पिछले पांच साल में शहर का औद्योगिक विकास काफी धीमा हो गया है। ऐसे में अब हैंडीक्राफ्ट के साथ अन्य उद्योगों के विकास के लिए नए औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकता है।
11. संक्रामक रोग संस्थान : शहर में पांच साल पहले इसकी स्थापना हुई। यहां संक्रामक रोगों पर शोध के साथ इस संबंध में चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होने थे। जिस उद्देश्य के लिए यह खोला गया था, वह आज भी पूरा नहीं हुआ। जबकि दूसरी ओर स्वाइन फ्लू, जीका व इबोला जैसे संक्रामक रोगों का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है।