
जोधपुर. एक तरफ धर्म परिवर्तन तो दूसरी तरफ कभी भी लूट होने का। कुछ ऐसी थी पाकिस्तान में हमारी जिंदगी। रोज-रोज की प्रताडऩा के दर्द से छुटकारा पाने सबकुछ छोड़ वर्ष 2004 में अपने वतन (भारत) आ गए। लेकिन यहां आने के बाद भी दर्द कम नहीं हुआ। 16 साल से अधिक समय हो गया अभी तक नागरिकता नहीं मिली। पाकिस्तानी से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी इसलिए यहां घर परिवार चलाने क्लीनिक खोला लेकिन झोलाछाप डॉक्टर समझ दो बार केस बना दिए, जेल तक जाना पड़ा। जिससे नागरिकता अटक गई। अब स्थानीय प्रशासन ही बता दे कि बीवी-बच्चों का पेट भरने के लिए क्या कंरू। डॉक्टर हूं डॉक्टरी ही करूंगा। मजदूरी तो कर नहीं सकता। इतना कहते डॉ नूरजी भील की आंखे भर आई।
चाचा का अपहरण तक हो गया था
डॉ नूरजी ने बताया कि वर्ष 1990 में चचा जग्गुराम का पाकिस्तान में कुछ बदमाशों ने बंदकू की नोंक पर अपहरण कर लिया। गोलियां भी चलाई। मैं छोटा था लेकिन मुझे भी डंडे मारे। डर के मारे भागना पड़ा। बाद में फिरौती दी तब चाचा को छोड़ा।
सर, क्वालिफाइड डॉक्टर हूं, एक एफआईआर ने अटका दी नागरिकता
शहर के अलकोसर कॉलोनी झंवर रोड रहने वाले डॉ नूरजी पुत्र गोदूराम भील ने बताया कि वे पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सांगण जिले में रहते थे। मुशिकल हालातों में डॉक्टरी की। सिंध यूनिवर्सिटी से वर्ष 2000 में बेचलर ऑफ मेडिकल और बेचलर ऑफ सर्जरी की डिग्री ली। लेकिन बाद में अत्याचार बढऩे लगे तो भारत आ गए। यहां आकर डॉक्टरी की लेकिन किसी की शिकायत पर छोलाझाप डॉक्टर समझ एफआईआर की दी गई। फरवरी 2020 को जेल जाना पड़ा। मेरी पत्नी को नागरिकता मिल गई लेकिन एफआईआर होने से मुझे नागरिकता नहीं मिल पा रही है। पांच बच्चे है उनकी उच्च शिक्षा को लेकर चिंतित हूं कि मुझे नागरिकता नहीं मिली तो उन्हें कैसे मिलेगी और उनका भविष्य किया होगा।