
जोधपुर. कई बार छोटी सी बात पर ही हम निराश हो जाते हैं। हम पॉजिटिव के बजाय नेगेटिव जल्दी हो जाते हैं और यही आगे चलकर सुसाइड का कारण बनता है। इसलिए हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि कोई यदि अपनी छोटी सी समस्या भी बता रहा है तो उसे समझें एवं उसकी यथासंभव मदद करें। यह कहना है एम्स के मनोचिकित्सकों का। विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के अंतर्गत एम्स में आयोजित सेमिनार में शुक्रवार को आत्महत्या की रोकथाम, कैसे मदद करें विषय पर लेक्चर का आयोजन हुआ। मनोचिकित्सकों ने आत्महत्या के कारण, इसे रोकने के उपाय सहित विभिन्न विषयों पर सुझाव दिए। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. तनु गुप्ता व डॉ. विजय सैनी ने किया।
स्टूडेंट्स न लें स्ट्रैस, रखें पॉजिटिव थिंक
डॉ. नरेश नेभिनानी के अनुसार आमतौर पर 15 से 25 की उम्र के यूथ में सुसाइड की प्रवृति ज्यादा पाई गई है। यूथ एग्जाम एवं कॉम्पीटिशन की तैयारी करते समय स्ट्रैस ज्यादा लेता है। कई बार घरवालों का भी प्रेशर रहता है। इसलिए सुसाइड जैसा कदम उठा लेता है। यूथ का पॉजिटिव होना बेहद जरुरी है। इसके अलावा 60 से अधिक उम्र के लोगों में सुसाइड की प्रवृति ज्यादा पाई गई है। इस उम्र के लोग कई बार इस अवस्था में आकर अकेले हो जाते हैं। कई बार घर में छोटी-बड़ी बात से ही वह स्ट्रैस में आ जाते हैं। इसलिए उन्हें अकेला नहीं छोडऩा चाहिए।
कॉम्पीटिशन के बजाय अपना बेस्ट दें
जॉब सेक्टर की बात करते हुए डॉ. जितेंद्र अनेजा ने बताया कि बदलती दुनिया में कॉम्पीटिशन बहुत बढ़ गया है। एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में स्ट्रैस एवं सक्सेस न होने की स्थिति में आत्महत्या जैसी स्थितियां भी पैदा हो जाती है। इसलिए कॉम्पीटिशन के बजाय अपना बेस्ट देने पर ध्यान देना चाहिए।
डॉ. मुकेश स्वामी के अनुसार कई बार कार्यस्थल पर भी सहकर्मियों से तालमेल नहीं बैठ पाता है। यह भी स्ट्रैस का कारण है। इसके समाधान के लिए उनकी छोटी-छोटी बातों पर भी थैंक्स बोलना, तारीफ करने, पॉजिटिव एवं मदद के लिए तत्पर रहने का भाव दिखाएं।
कोई परेशानी में हैं तो उसकी मदद करें
डॉ. मुकेश स्वामी के अनुसार कई बार व्यक्ति जिंदगी की असफलताओं से निराश हो जाता है। ऐसे व्यक्ति यदि आपके आस-पास या परिवार में भी हो तो नजरअंदाज करने के बजाय उसकी मदद करें। उनका मनोबल बढ़ाएं। जहां तक हो सके उन्हें अकेला नहीं छोड़े। ऐसा करके आप निराश व्यक्ति की जीवन की मुश्किलों को न सिर्फ हल कर सकते हैं बल्कि सुसाइड के आंकड़ों को भी कम कर सकते हैं।