
चामू (जोधपुर). सरकार लोगों की परेशानी को खत्म करने के लिए अंतिम छोर तक पहुंचने का दावा करती रही हो। उन दावों पर खरा उतरने के लिए कई योजनाओं में लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिए जाते है।
उसके बाद सरकारी मापदंडों की अनदेखी से ही इनका लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाता और लोगों की समस्या बदस्तूर जारी रहती है। कई बार ऐसी योजनाएं राजनीतिक उपेक्षा का भी शिकार हो जाती है।
कुछ ऐसा ही मामला बन्नों का बास ग्राम पंचायत के गुमान नगर में देखने को मिल रहा है। दरअसल यहां पूर्व तत्कालीन शेरगढ़ विधायक बाबूसिंह राठौड़ ने हिमालय पेयजल योजना के तहत निर्मित होने वाले उच्च जलाशय का शिलान्यास दिसंबर 2015 में किया था।
अप्रेल 2016 में लाखों रुपए की राशि खर्च करके उच्च जलाशय का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया गया। उसके बाद कुछ ही समय में नाथड़ाऊ उच्च जलाशय से पाइप लाइन बिछाकर राजस्व गांव गुमाननगर स्थित उच्च जलाशय को जोड़ा गया था। फिर उसके बाद पूरा काम सुस्त पड़ता गया।
हिमालय प्रोजेक्ट योजना अधिकारियों व प्रशासन की उदासीनता के चलते अब चार वर्ष बीत जाने के बावजूद भी अभी तक ढाणियों व ढाणियों में स्थित जीएलआर को पाइप लाइन से नहीं जोड़ा गया है। ऐसे में सादुलनगर, गुमाननगर व मानसिंह नगर के ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।
भाटियों की ढाणियों, ब्राह्मणों की ढाणियों, लाखाणी मेघवालों की ढाणियों में पानी के लिए त्राहि त्राहि मची हुई है। ग्रामीणों के साथ साथ मवेशियों को भी पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने वीटीसी लाइन बिछाने को लेकर कई बार शिकायतें की, लेकिन अभी तक समस्या बरकरार है।
इन्होंने कहा
हिमालय पेयजल योजना के लिए अलग से कर्मचारी व अधिकारी लगे हुए है। हमारा काम पीएचईडी के अधीन संचालित नलकूपों का काम देखने का है। फिर भी वे हिमालय पेयजल योजना के अधिकारियों से इस मामले में बात करेंगे।
जैतसिंह, सहायक अभियंता, पीएचईडी बालेसर।