
अविनाश केवलिया/जोधपुर. इस वर्ष इंदिरा गांधी नहर में प्रस्तावित सबसे बड़े 70 दिन के क्लोजर के बीच एक राहत भरी खबर है। 70 दिन में से करीब 40 दिन तक राजस्थान के हिस्से का पेयजल योग्य पानी पंजाब सरकार छोडऩे पर सहमत हो गई है। ऐसे में जरूरत के हिसाब से पानी पंजाब से वैकल्पिक नहर से राजस्थान की मुख्य नहर में छोड़ा जाएगा। राजस्थान में हर साल की तरह इस बार भी 30 से 35 दिन तक ही नहरबंदी प्रभावी रहेगी। जोधपुर जिला कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित के साथ एक बैठक में पश्चिमी राजस्थान के पीएचइडी-जल संसाधन विभाग के बड़े अधिकारियों की बैठक में यह जानकारी दी गई।
जोधपुर जोन के पीएचइडी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता नीरज माथुर ने बताया कि पंजाब के हिस्से की नहर में पहली बार मरम्मत का बड़ा कार्य करवाया जा रहा है। इसी कारण इस बार 70 दिन का क्लोजर प्रस्तावित है। लेकिन राजस्थान के कई जिलों में इतने बड़े स्तर पर पानी स्टोरेज की व्यवस्था नहीं होने से संकट खड़ा हो रहा था। राजस्थान और पंजाब सरकार में चली वार्ता के बाद अब पंजाब के अधिकारी 40 दिन तक वैकल्पिक नहर से पेयजल जितना पानी देने को सहमत हुए हैं। यह क्लोजर मार्च माह के अंतिम सप्ताह में शुरू होगा। बैठक में हनुमानगढ़, बीकानेर क्षेत्र के अधिकारियों के साथ जोधपुर के पीएचइडी विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
हर साल 30-35 दिन का क्लोजर
40 दिन तक नहर से पानी मिलने से क्लोजर हर साल की तरह 30 से 35 दिनों तक ही प्रभावी होगा। इस अवधि तक पश्चिमी राजस्थान को पानी पिलाने के लिए कुछ पानी मुख्य नहर में तो कुछ सहायक केनाल में स्टोर किया जाता है।
तीसरे चरण से बड़ी उम्मीद
पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, पाली जिलों को राजीव गांधी लिफ्ट केनाल परियोजना के तृतीय चरण से काफी उम्मीदें हैं। इस परियोजना में करीब 70 दिन से अधिक दिनों तक पानी पिलाने के लिए भंडारण के एक बड़े जलाशय का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह जलाशय इंदिरा गांधी मुख्य नहर की बुर्जी 1109 पर जैसलमेर के मदासर गांव में प्रस्तावित है। 1454 करोड़ के तृतीय चरण प्रोजेक्ट में इस बड़े जलाशय की कीमत 301 करोड़ रुपए आकी गई है। यह जलाशय 600 हेक्टेयर भूमि पर बननेगा, जिसमें 885 एमसीएफटी पानी को स्टोर किया जा सकेगा।