जोधपुर

महाराजा उम्मेदसिंह के राज्यकाल में परकोटे बाहर आया था बाजार

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Mar 02, 2021
महाराजा उम्मेदसिंह के राज्यकाल में परकोटे बाहर आया था बाजार
महाराजा उम्मेदसिंह के राज्यकाल में परकोटे बाहर आया था बाजार

जोधपुर. स्थापत्य कला के खजाने और विशाल परकोटे से घिरे सुरक्षित नगर जोधपुर की स्थापना के बाद से विगत साढ़े पांच शताब्दियों में यहां के कुशल कारीगरों ने मंदिर, हवेलिया, महलों, तालाबों, झालरों आदि सुंदर स्मारकों भवनों का निर्माण किया। महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय ने सर्वप्रथम जोधपुर नगर को आधुनिक ढंग से साफ सुथरा रखन के प्रयास शुरू किए थे। उस समय तक जोधपुर की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही थी। शहर में व्यवस्थित सफाई व्यवस्था सन 1875 में शुरू की गई थी। कुछ वर्षों बाद ही 3 मई 1884 को डाक्टर अर्चिबाल्ड एडम्स रेजीडेन्सी सर्जन की अध्यक्षता में जोधपुर नगर में नगर पालिका की स्थापना की गई। जोधपुर की संस्कृति और बसावट की झलक आज भी परकोटे के भीतरी शहर में ही नजर आती है। शहर के पारम्परिक प्राचीन बाजार घंटाघर तीजामांजी मंदिर से लेकर आडा बाजार तक है लेकिन नया बाजार घंटाघर गिरदीकोट में सन 1910 में बना जिसका नाम सरदार मार्केट रखा गया। महाराजा उम्मेदसिंह 1918-1947 के राज्यकाल में सोजती दरवाजा और जालोरी दरवाजे के बाहर के बाहर अधिकांश दुकानें बनी थी। वर्ष 1981 में जोधपुर की जनसंख्या 4 लाख 93 हजार 609 थी जो वर्तमान में तीन गुणा से अधिक हो चुकी है।

Updated on:
02 Mar 2021 11:39 pm
Published on:
02 Mar 2021 11:39 pm