जोधपुर

अब चारे-पानी के अभाव में दम तोड़ रहा गोवंश

बालेसर उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बारनाऊ में ग्राम पंचायत एवं ग्रामीणों की ओर से 4 वर्ष पूर्व शुरू की गई गोशाला का उचित रख-रखाव व देखभाल न होने से कई गोवंश की भूख व प्यास के मारे तड़प-तड़पकर मौत हो गई है।
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Feb 13, 2020
Dying cow dynasty
अब चारे-पानी के अभाव में दम तोड़ रहा गोवंश

बालेसर (जोधपुर). बालेसर उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बारनाऊ में ग्राम पंचायत एवं ग्रामीणों की ओर से 4 वर्ष पूर्व शुरू की गई गोशाला का उचित रख-रखाव व देखभाल न होने से कई गोवंश की भूख व प्यास के मारे तड़प-तड़पकर मौत हो गई है।

जागरूक ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत बारनाऊ में करीब 4 वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने जन सहयोग से यह गोशाला शुरू की थी। इस गोशाला में आवारा पशुओं को एकत्रित कर जन सहयोग से चारा-पानी की व्यवस्था की जा रही थी। कुछ समय तक तो यह व्यवस्था सही चली, लेकिन कालांतर में यह गोशाला जातिवाद व राजनीति का शिकार हो गई। ग्राम पंचायत व जागरूक लोगों ने इस गोशाला की तरफ ध्यान देना ही बंद कर दिया। इसका नतीजा यह रहा कि करीब 150 गोवंश में से अब मात्र 20 या 25 गोवंश जीवित बचा हैं।


उपेक्षा की हद

गत कई माह से इस गोशाला में पल रहे गोवंश की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। यहां न तो चारा की व्यवस्था है न ही पानी की। इतना ही नहीं, ग्राम पंचायत ने इस गोशाल में पल रहे गोवंश को किसी अन्य गोशाला में स्थानांतरित करने की भी जहमत नहीं उठाई। भगवान भरोसे चल रही इस गोशाला में पिछले 2 महीने में कई गायें भूख एवं प्यास से तड़प-तड़पकर हुए मर गई। मरे हुए गोवंश के पास उठने-बैठने से संक्रमण फैलने से बची-खुची गायें भी बीमार पड़ गई हैं।


गायों के नाम एकत्र होता है चंदा


ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव में हर वर्ष कई संत आकर कथा ज्ञान यज्ञ आयोजित कर गोशाला के नाम लाखों रुपए का चंदा एकत्रित करते हैं, लेकिन इन बेसहारा गायों के लिए कोई भी चारा-पानी की व्यवस्था नहीं करते हैं। इस गांव में 14 फरवरी से कथा शुरू होने वाली है, जहां गोशाला के नाम से सहयोग राशि जुटाई जाएगी, लेकिन गांव में संचालित गोशाला में भूख व प्यास से तड़प रहे गोवंश को लेकर किसी को चिंता नहीं है।


इनका कहना है


इस गांव में ग्रामीणों व ग्राम पंचायत के सहयोग से कुछ वर्ष पूर्व गोशाला शुरू की थी, लेकिन आज यह गोशाला पशुओं की मौतशाला बन गई है। ना तो ग्राम पंचायत ध्यान दे रही है न ही प्रशासन। इस गोशाला में आवारा गोवंश भूख एवं पानी से तड़प रहा है।

-हुकमसिंह देवानिया, सामाजिक कार्यकर्ता

मैंने विकास अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। वे मौके पर जाकर हालात का जायजा लेंगे तथा मृत गोवंश को हटाने एवं शेष रही गोवंश के लिए चारा पानी की व्यवस्था करेंगे। इनके साथ ही शेष गोवंश को अन्य बड़ी गोशाला में स्थानांतरित करवाएंगे।

-महावीरसिंह जोधा, उपखंड अधिकारी, बालेसर

Published on:
13 Feb 2020 12:50 pm