
बागवानी के साथ मसाला खेती में भी रुझान
भोपालगढ़ क्षेत्र सहित मारवाड़ में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। किसान कम पानी में होने वाली बागवानी व मसाला खेती को प्राथमिकता देने लगे हैं।
बूंद-बूंद सिंचाई से जल की हुई बचत
सुखीदेवी ने बताया कि व्यर्थ पानी के संचय के लिए उन्होंने कुछ साल पहले फॉर्मपौण्ड बनवाया था। इसमें खरीफ व रबी की सिंचित फसलों की खेती शुरू की। सरकारी अधिकारियों ने भी खेत में मिट्टी-पानी की जांच के अनुसार बूंद-बूंद सिंचाई के लिए ही प्रेरित किया।
पौधों के बीच खाली भूमि पर उगाई फसल
किसान ने करीब चार साल पहले चार हजार अनार के पौधे लगाए। पौधों के बीच खाली जमीन पर वे अन्य फ सलों की पैदावार भी ले रही हैं। कम पानी में अनार की पौध पनप गई और पौधों के बीच की खाली जमीन पर सिचिंत खेती का अतिरिक्त लाभ भी हो रहा है। उन्होंने गत वर्ष 16 लाख रु. की कमाई की है।
हर पौधे पर 70 से 80 तक फल
किसान सुखीदेवी प्रेमाराम डूडी के खेत में लगाए अनार के बगीचे के प्रत्येक पौधे पर 70 से 80 तक फ ल लगे हैं। प्रति पौधा करीब आठ-दस किलोग्राम फ ल दे रहा है। देसी अनार 30 से 50 रुपए किलो तक थोक में बिक रहे हैं ।
इनका कहना है...
बगीचे पर देय है अनुदान
उद्यान विभाग की ओर से संचालित राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना में बगीचा स्थापित करने पर अनुदान देय है। कुड़ी निवसी किसान ने योजना का लाभ लिया। बागवानी खेती भी आय वृद्धि का अच्छा विकल्प है।
रफीक अहमद कुरैशी, एएओ, उद्यान, भोपालगढ़
बागवानी खेती को प्राथमिकता
भूमिगत जल के गहराई में जाने पर किसानों का बागवानी खेती को प्राथमिकता देना अच्छा कदम है। भविष्य में यह किसानों के लिए आय का सबसे अच्छा माध्यम बन कर उभरेगा।
शिवदानसिंह बासनी सेजां, विकास अधिकारी, भोपालगढ़
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना में भी अनुदान
कृषि-उद्यान विभाग की ओर से बागवानी खेती एवं राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना में नवीन बगीचा स्थापित करने एवं नवाचार के रूप में खजूर की खेती पर भी अनुदान देय है।
जयनारायण स्वामी, उपनिदेशक उद्यान, जोधपुर
पीआर गोदारा — भोपालगढ़