
अड़तालीस साल बाद पढ़ेंगे आपातकाल
- एनसीईआरटी की 12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान में 18 पेज का पूरा अध्याय
- हनुमान गालवा
जोधपुर. अड़तालीस साल बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूलों में आपातकाल को पढ़ाया जाएगा। सत्र 2023-24 में बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी राजनीति विज्ञान में न केवल आपातकाल के पूरे घटनाक्रम को जानेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) बारहवीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की किताब 'पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस' के चैप्टर छह 'दी क्राइसिस ऑफ डेमोक्रेटिक ऑर्डर ' में आपातकाल को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई। पूरे 18 पेज में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आपातकाल थोपने के फैसले के प्रभाव और दुष्प्रभाव को लेकर भी हर पहलू पर चर्चा की गई है।
बरुआ का बयान भी
एनसीईआरटी की किताब में कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष डी.के. बरुआ के नारे 'इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा ' की चर्चा से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के जिक्र के साथ आपातकाल थोपने के घटनाक्रम का बारीकी से विश्लेषण दिया गया है।
राजस्थान में भी पढ़ेंगे
चूंकि राजस्थान में भी अब एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही पढ़ाया जाएगा। लिहाजा प्रदेश के स्कूलों में भी विद्यार्थी आपातकाल का यह पाठ पढ़ेंगे। हालांकि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने आपातकाल को संक्षिप्त में पाठ्यक्रम में शामिल किया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे हटाया दिया था।
पाठ में आपातकाल को लेकर सवाल
- देश में आंतरिक अशांति के नाम पर आपातकाल क्यों लागू किया गया? क्या ऐसा करना जरूरी था?
- आपातकाल लागू करने का व्यावहारिक अर्थ क्या था?
- दलगत राजनीति के लिहाज से आपात के क्या परिणाम हुए?
- आपातकाल से भारतीय लोकतंत्र ने क्या सबक सीखे?
- क्या राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सिफारिश के बगैर आपातकाल की घोषणा करनी चाहिए?
भुलाया नहीं जा सकता
आपातकाल को भुलाया नहीं जा सकता है। कर्मचारियों को नसबंदी का एक केस नहीं लाने पर तनख्वाह रोक दी जाती थी। नई पीढ़ी को हमारे राजनीतिक नेतृत्व की भूल और मनमानी की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि लोकशाही में मनमानी या गलती की पुनरावृत्ति से बचा जा सके।
- रामकृष्ण अग्रवाल, अध्यक्ष, राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ
सच बताएं
सच स्वीकारने और चूक से सबक लेकर ही लोकशाही को मजबूती दी जा सकती है। सच को न तो दबाया जा सकता है और न छुपाया जा सकता है। आपातकाल हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में एक काला अध्याय था। इसके बारे में विद्यार्थियों को बताकर ही लोकतंत्र को ऐसे कलंक से बचाया जा सकता है।
- हनुमान चोयल, टीजीटी, जवाहर नवोदय विद्यालय, तिलवासनी