
आरपी बोहरा/जोधपुर. शक के आधार पर जब अदालतें फैसला सुना देती हैं और परिस्थितिजन्य मामला बताते हुए कथित आरोपी को उम्र कैद तक की सजा दे देती हैं तो फिर उन्मुक्त, स्वच्छंद और खुलेपन की सीमाएं तोड़ते पाश्चात्य जीवन शैली की मूल कथा में ट्रेजेडी का तडक़ा ठीक उसी तरह है, जैसे मारवाडी मिष्ठान्न को टमाटो सॉस के साथ गृहण करना। नोबल पुरस्कार विजेता इतालवी लेखक डारियो फो व उनकी पत्नी फ्रांका रेमे लिखित इस धीर गंभीर नाटक का सबसे उजला पक्ष नाटक की एकल पात्र मारिया (पूजा जोशी) है जिसने शरीर में किसी भटकती आत्मा की तरह प्रवेश करते हुए ऐसा जीवंत अभिनय किया कि प्रेक्षागृह में बैठा दर्शक हिलने की जहमत भी नहीं उठा सका।
पूजा ने नाटक के डॉयलॉग कंठस्थ कर रखे थे। उच्चारण व हावभाव से उसने एक घर में कैद लेकिन अपने सामजिक सारोकारों के प्रति सजग नारी का ऐसा खेला प्रस्तुत किया कि हॉलिवुड की कोई एक्ट्रेस भी उसका मुकाबला नहीं कर सकती थी। निर्देशक उम्मेद भाटी की प्रस्तुति को भले ही द थर्ड बेल आट्र्स एंड कल्चरल सोसाइटी की प्रस्तुति कहा जा रहा हो, लेकिन पूरा नाटक पूजा जोशी के खाते में खेला गया।इस नाटक में नवीन रतावा की भूमिका ने भी दर्शकों को गुदगुदाया। नाटक को कुछ हट के प्रस्तुत करने में इसके सेट डिजाइनर्स हीरालाल भाटी, जीतेन्द्र वाघेला और सौरभ देवड़ा की टीम, कास्ट्यूम व मेकअप में नीलम भाटी ने और स्टेज लाइटिंग में चन्द्रसिंह भाटी ने खूब मेहनत की।