जोधपुर

एनजीटी के आदेश के एक साल बाद भी सूरसागर तालाब के नहीं सुधरे हालात

स्टेट लेक ऑथरिटी की ओर से सूरसागर जलाशय को मिल चुकी झील की मान्यता, गजट नोटिफिकेशन में भी झील घोषित
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Oct 27, 2020
एनजीटी के आदेश के एक साल बाद भी सूरसागर तालाब के नहीं सुधरे हालात
एनजीटी के आदेश के एक साल बाद भी सूरसागर तालाब के नहीं सुधरे हालात

जोधपुर. एक साल पहले एनजीटी के आदेश के बाद भी सूरसागर तालाब के एक बड़े हिस्से में मलबा-कचरा आदि से पाटने की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में नगर निगम व जिला प्रशासन नाकाम रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल, भोपाल ने सितम्बर 2019 में सूरसागर तालाब में डाले जा रहे मलबे व उस पर किए जा रहे अतिक्रमण को तुरन्त प्रभाव से हटाने का निर्णय पारित किया था। पर्यावरण प्रेमी प्रीतम जोशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने सूरसागर जलाशय पर हो रहे अतिक्रमण तथा उसमें डाले जा रहे मलबे और गतिविधियों को बंद कर आयुक्त नगर निगम जोधपुर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी हालात जस के तस है। तालाब से सटे देवकुण्ड वन क्षेत्र की पहाडिय़ों का पानी इसी तालाब में एकत्र होता था। तालाब का आगोर बड़ा होने के कारण बरसाती पानी वनक्षेत्र के रावटी की पहाडिय़ों से होकर आता था लेकिन वन क्षेत्र में अंधाधुंध अतिक्रमण होने के कारण तालाब में पानी की आवक थम गई है।

पांच साल से डाल रहे मलबा कचरा
सूरसागर बाइपास से बालसमंद तिराहे तक फोर लेन सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने के बाद ठेकेदार की ओर से वर्ष 2014-15 में तालाब के भीतर मलबा डलवाना शुरू किया गया। उसके बाद धीरे धीरे पूरा तालाब ही डम्पिंग स्टेशन में तब्दील होने लग गया। कैचमेंट क्षेत्र में लगातार मलबा डालने से आसपास के जलाशय भी बुरी तरह प्रभावित हुए। बहाव क्षेत्र का पानी तालाब तक नहीं पहुंचने से पूरा क्षेत्र बारिश होते ही जलमग्न हो जाता है। क्षेत्र के मंदिर व बावडिय़ां अभी तक पानी में डूबे पड़े है। सूरसागर महल और महल से सटे ऐतिहासिक तालाब के रखरखाव व देखरेख की जिम्मेदारी वर्ष 2014 में राज्य सरकार ने एमओयू के तहत मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट को सौंपी गई है।

तालाब की फेक्ट फाइल
1595 से 1619 तक जोधपुर के शासक रहे महाराजा सूरसिंह ने करवाया सूरसागर तालाब का निर्माण।
8 वर्ष में तैयार हुआ था तालाब
2 कुएं और तीन बावडिय़ा भी है तालाब में

सूरसागर को झील घोषित हो चुकी सूरसागर
स्टेट लेक ऑथरिटी ने सूरसागर को झील की मान्यता दे दी है। राज्य सरकार ने गजट नोटिफिकेशन में भी लेक घोषित कर दिया गया है। एनजीटी की ओर से आदेश में निगम व जिला प्रशासन को पाबंद किया था कि तालाब से मलबा और अतिक्रमण हटाया जाए लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
करणीसिंह जसोल, निदेशक, मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट

Published on:
27 Oct 2020 05:43 pm