
जोधपुर. वाजपेयी का मारवाड़ से पुराना नाता था। पूर्व रक्षा मंत्री जसवंतसिंह जसोल और पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत से नजदीकी के कारण मारवाड़ में उनका कई बार आना हुआ। वर्ष १९८७ में तीन दिन के लिए जोधपुर रुके थे। यहां राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के लिए वे आए थे। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और उपाध्यक्ष राजेन्द्र गहलोत ने भी अपनी यादें साझा करते हुए बताया १९७७ में जब वाजपेयी विदेश मंत्री थे तब भी जोधपुर आगमन के दौरान उनसे मिले थे और कई कार्यक्रमों में शामिल हुए। १९८७ और १९८८ में जोधपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। १९९९ और २००४ में भाजपा के सांसद प्रत्याशी जसवंत सिंह विश्नोई की चुनावी सभाओं को भी संबोधित किया।
कैर-सांगरी भा गई
भाजपा के सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक कानराज मोहनोत बताते हैं कि २३ जून १९८६ को घंटाघर में एक सभा के दौरान कहा था कि यदि पार्टी फंड के लिए राशन कम दोगे तो भाषण कम दूंगा। उस समय उन्हें कैर-सांगरी की सब्जी पसंद आई थी। तब उन्हें सूखी सांगरियां दिखाई तो उन्होंने इस सब्जी पर आश्चर्य भी जताया था।
संस्मरण जो याद आते हैं
भाजपा ग्रंथालय निर्माण प्रकल्प के प्रदेश प्रमुख राजेन्द्र बोराणा ने वाजपेयी से जुड़े संस्मरण बताते हुए कहा कि १९८७ में जब वे भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे तो एयरपोर्ट पर वाजपेयी के स्वागत के लिए पहुंचे थे। तब भीड़ अधिक होने के कारण अव्यवस्था हो गई। इस पर वाजपेयी नाराज हुए और सभी कार्यकर्ताओं को कतार में खड़ा कर सब से मिले। इससे बोराणा नाराज हुए तो वाजपेयी को वह बात याद रही और बाद में उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं से अलग से मुलाकात की। एयरपोर्ट से सर्किट हाउस तक उन्हें रैली के रूप में लाया गया। तीन दिवसीय कार्यसमिति की बैठक के अंतिम दिन नई सडक़ पर एक बड़ी सभा हुई थी।
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१४ साल पहले स्टेडियम में की थी अंतिम सभा
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद जसवंत सिंह विश्नोई ने बताया कि २००४ में जब वे चुनाव लड़ रहे थे तो अंतिम बार राजनीतिक यात्रा पर वाजपेयी जोधपुर आए थे। २००४ में वह सभा राजकीय उम्मेद स्टेडियम में हुई थी। उन्होंने बताया कि उनके सांसद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडऩे के दौरान वाजपेयी चार बार जोधपुर आए थे।
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