
अविनाश केवलिया/जोधपुर. इस साल मानसून देरी से विदा हुआ। गिनाने को इसके कई नुकसान हैं, लेकिन एक अच्छी बात भी सामने आई है। ज्यादा दिन तक ठहरे बादल ने तापमान गिराया। इसका असर यह हुआ कि पिछले माह प्रदेश में प्रतिदिन औसत 100-150 लाख यूनिट(एलयू) बिजली का उपभोग कम हुआ। पिछले साल की तुलना में इस बार का अक्टूबर माह में न्यूनतम तापमान तीन से चार डिग्री तक कम दर्ज हुआ।
इससे घरों में चलने वाले एसी, कूलर और अन्य उपकरण जल्द बंद हो गए। इससे पिछले साल की तुलना में बिजली की औसत खपत 7 प्रतिशत तक कम हुई। विद्युत प्रसारण निगम के प्रतिदिन के आंकड़ों के अध्ययन में यह बात स्पष्ट होती है। पूरे माह की बात करें तो करीब 3 हजार एलयू बिजली पिछले साल की तुलना में कम उपभोग हुई।
खास बात यह है कि यदि हर साल उसी माह की पिछले साल से तुलना की जाती है तो औसत 5 से 7 प्रतिशत तक बिजली उपभोग बढ़ा हुआ आता है। उसका प्रमुख कारण यह है कि नए कनेक्शन और लोड का लगातार बढ़ते रहना। इस बार लोड बढऩे के बावजूद उपभोग नहीं बढ़ा। इससे प्रदेशवासियों को करोड़ों रुपए बिल के रूप में कम चुकाने पड़ेंगे।
आंकड़ों में बात
वर्ष 2018 में अक्टूबर माह की स्थिति
- औसत रात का तापमान 20 डिग्री से सेल्सियस अधिक रहा था।
- इसी कारण 2100 से 2250 लाख यूनिट के बीच पूरे प्रदेश में बिजली खपत थी।
- न्यूनतम बिजली उपभोग 7 अक्टूबर को 2107.73 लाख यूनिट रहा था।
- अधिकतम बिजली उपभोग 29 अक्टूबर को 2244.24 लाख यूनिट रहा।
वर्ष 2019 में अक्टूबर माह की स्थिति
- औसत रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे रहा। न्यूनतम तापमान 16.5 तक भी पहुंच गया।
- इसी कारण औसत उपभोग इस माह में 1750 से 2100 लाख यूनिट तक रहा।
- न्यूनतम बिजली उपभोग 28 अक्टूबर को 1752.98 लाख यूनिट रहा।
- अधिकतम बिजली उपभोग 17 अक्टूबर को 2138.56 लाख यूनिट रहा।
इनका कहना है...
‘तापमान कम होने से थोड़ा प्रभाव तो पड़ा ही था। हर साल 5 से 7 प्रतिशत बिजली उपभोग बढ़ता है लेकिन वह इस बार नहीं बढ़ा।
- अविनाश सिंघवी, प्रबंध निदेशक, जोधपुर डिस्कॉम