
जोधपुर।
हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े निर्यातकों को दो वर्षों से निर्यात प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी है। ऐसे में उनके लिए निर्यात को गति देने में दिक्कतें आ रही है। निर्यातकों की समस्या दूर करने के लिए अब केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने एक रास्ता खोज लिया है। इसके तहत निर्यातकों को बैंकों के जरिए न्यूनतम ब्याज पर लोन दिलाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे निर्यातकों की समस्या का समाधान तो हो जाएगा, लेकिन उन पर दो से ढाई फ ीसदी ब्याज का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
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ऑर्डर्स की भरमार
कोरोना की दूसरी लहर का असर कम होने के साथ ही जोधपुर के हस्तशिल्प निर्यातकों के पास ऑर्डर्स की भरमार है। इन्हें पूरा करने के लिए निर्यातकों को बड़ी धनराशि चाहिए। इसके लिए निर्यातकों ने वाणिज्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक को पत्र लिखे, पर नतीजा कोई नहीं निकला।ऐसे में सरकार से इस बात पर सहमति बनी कि जब तक सरकार से प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं होता है, तब तक के लिए निर्यातकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के सहयोग से न्यूनतम ब्याज पर पूंजी की व्यवस्था कराइ जाए। इस संबंध में आरबीआइ बैंकों को पत्र जारी कर चुका है । इसके तहत बैंकों से कर्ज लेकर निर्यातक अपने ऑर्डर पूरे करेंगे। इसके बाद सरकार से भुगतान मिलने पर वह राशि बैंकों को दे दी जाएगी।
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नहीं मिली 200 करोड़ की राशि
केन्द्र सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन राशि के रूप में 9 हजार करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। जोधपुर के निर्यातकों को मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआइएस) में 200 करोड़ रुपए मिलने थे। लेकिन कोरोना संकट के बीच यह राशि नहीं मिली।
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सरकार के इस कदम से निर्यातको को कुछ फ ायदा तो होगा पर बैंका का अतिरिक्त ब्याज भी निर्यातकों को भरना होगा । सरकार को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अन्य प्रोत्साहन देने की दरकार है ।
महावीर बागरेचा, उपाध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन