
जोधपुर।
जिले में गिरते भूजल व एक ही फ सल के लगातार बुवाई करने से घटते उत्पादन के चलते किसानों की प्रभावित हो रही आमदनी के बीच फ लदार पौधें उम्मीद बन सकते है। फ लदार पौधे के बगीचों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली के परिणाम अच्छे आते है, इस कारण किसानों का ड्रिप सिंचाई प्रति रुझान बढ़ रहा है। ड्रिप सिंचाई के उपयोग से उत्पादन बढऩे के साथ साथ पानी की भी बचत होती है। ऐसे में कम पानी वाले क्षेत्र व जहां गहरा भूजल होने के कारण पानी क्षारीय है, ऐसे क्षेत्रों में किसान अनार, बेर, नीम्बू, अंजीर व आंवला जैसे पौधे लगाकर आमदनी ले सकते है।
-
अनुदान का प्रावधान
जिले में उद्यान विभाग की ओर से अनार, बेर, नीम्बू के बगीचें लगाने के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है। कृषि अधिकारी बलवीरसिंह के अनुसार 0.4 हैक्टेयर से 4 हैक्टेयर क्षेत्रफल पर बगीचों पर लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 30 हजार अनुदान दिया जाएगा। यह अनुदान तीन किस्तों में दिया जाएगा।
--
पारंपरिक खेती के अलावा आमदनी का जरिया
मानसून के सक्रिय होने से पहले किसानों के पास काफ ी वक्त है। ऐसे में वक्त का सदुपयोग करते हुए किसान पारंपरिक खेती के अलावा आमदनी का जरिया बढ़ाने वाली खेती भी कर सकते है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण आमदनी बढ़ाने वाला कार्य है फ लदार पौधों के बगीचे स्थापित करना है। प्रगतिशील किसान तुलछाराम सिंवर ने बताया कि जिले में भूजल गहरा होने से सिंचाई के पानी की कम उपलब्धता व क्षारीय हो जाने से किसानों का परंपरागत फ सलों के बजाय अनार, बेर,नीम्बू, आंवला व अंजीर के फ लदार बगीचों के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
--