
जोधपुर. जंगली जानवरों और पक्षियों को खेतों से भगाने के लिए किसानों को अब रात भर रुककर फसल की रखवाली नहीं करनी पड़ेगी। एग्री कैनन (कृषि बंदूक) और बायोअकॉस्टिक नामक डिवाइस विभिन्न तरह की आवाजें विभिन्न फ्रीक्वेंसी और समयांतराल में निकाल कर खेत की रखवाली करेंगे। कृषि बंदूक में जहां एसिटिलीन गैस से धमाके की आवाजें आएंगी, वहीं बायोअकॉस्टिक डिवाइस में शेर, बाघ, तेंदुए से लेकर हाथियों के चिनगाडऩे की आवाजें सुनाई देगी। काजरी जोधपुर में चल रहे ऑल इंडिया नेशनल प्रोजेक्ट ऑन वर्टिब्रेट पेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना स्टेट कृषि विश्वविद्यालय ने यह दोनों डिवाइस विकसित की हैं। हाल ही में गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में इनको प्रदर्शित भी किया गया, जिनको काफी सराहा गया। वाणिज्यिक स्तर पर उत्पादन के लिए कंपनी के साथ एमओयू किया गया है। दोनों डिवाइस खरीदने पर किसानों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत 50 फीसदी सब्सिडी भी दी जाएगी। कृषि बंदूक की कीमत करीब 4 हजार और बायोअकॉस्टिक की कीमत 20 हजार रुपए के पास है।
कैसे काम करेगी कृषि बंदूक
कई बीघा में फैले खेतों में अक्सर नीलगाय, सूअर, बंदर सहित कई जानवर व पक्षी घुसकर फसलों को बर्बाद कर देते हैं। कृषि बंदूक डिवाइस में कार्बाइड भरा होगा। इसके जलने पर धमाके के साथ एसिटिलीन गैस निकलेगी। ऐसा लगेगा जैसे बंदूक चल रही है। इससे जानवर-पक्षी खेत से दूर रहेंगे।
इंटरनेट आधारित है बायोअकॉस्टिक
बायोअकॉस्टिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित है। किसान घर बैठे मोबाइल से इसको ऑन/ऑफ कर सकता है। यह सोलर प्लेट से चार्ज होगा। इसमें शिकारी जानवरों की आवाजें, जंगल की धीमी आवाज, शिकार की आवाज, विभिन्न तरह के मूवमेंट की ध्वनियां विभिन्न फ्रीक्वेंसी पर एक सॉफ्टवेयर के जरिए डाली गई है जो निश्चित समयांतराल पर सुनाई देती है। इससे जानवर को यह नहीं लगता है कि यह रिर्कोडेड है या असली।
‘डिवाइस इस्तेमाल से किसान अपने खेतों से जंगली जानवरों और पक्षियों को दूर रख पाएंगेे और फसल की रक्षा हो सकेगी।’
डॉ आरएन त्रिपाठी, प्रधान वैज्ञानिक, काजरी जोधपुर