
जोधपुर. भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के मजदूर राशन की दुकानों के लिए गेहूं का उठाव करने आने वाले ट्रक ड्राइवर्स से ‘डाला’ के रूप में 50 किलो के प्रत्येक बोरे के लिए 1 रुपया वसूलते हैं। पूरे प्रदेश में हर महीने 30 लाख क्विंटल गेहूं का उठाव होता है। इसके लिए करीब 60 लाख रुपए अदा करने के बाद ही गेहूं का लदान हो पाता है।
एफसीआई के अधिकारी हालांकि इस वसूली को गलत बता रहे हैं, लेकिन जोधपुर में ‘डाला’ वसूली के विरोध पर सोमवार को राजस्थान राज्य नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम के 7 कर्मचारियों सहित 12 से अधिक लोगों को एफसीआई दफ्तर से बाहर निकाल दिया गया। ये कर्मचारी पिछले दो साल से एफसीआई में बैठकर ही काम करते हैं, लेकिन इन्हें सोमवार को गोदाम के बाहर सडक़ किनारे बैठकर काम करना पड़ा।
डीएसओ तक पहुंची शिकायत
पिछले दिनों नागरिक आपूर्ति खाद्य निगम के कार्मिकों ने जिला रसद अधिकारी (डीएसओ) राधेश्याम डेलू को इसकी शिकायत की। डीएसओ ने एफसीआई अफसरों से बात की तो डाला बंद कर दिया गया, लेकिन डाला वसूली का दबाव अब भी खत्म नहीं हुआ है।
इसलिए होती है वसूली
दरअसल एफसीआई में लोडिंग-अनलोडिंग ठेका हो रखा है। ठेकेदार मजदूर को 1.50 रुपया प्रति कट्टा देता है। मजदूर 2.50 रुपए मांगते हैं। इसलिए वे शेष एक रुपया ट्रक ड्राइवर से लेते हैं। मना करने पर या तो ट्रक कट्टे कम भर दिए जाते हैं या काफी देर तक लदान रोक दिया जाता है। कई बार घटिया माल भी भर दिया जाता है।
अन्य जिलों में भी विरोध
सिरोही में ट्रक ड्राइवर्स ने सोमवार को ‘डाला’ देने से मना किया तो मजदूरों ने लदान ही नहीं किया। जैसलमेर व उदयपुर में भी ‘डाला’ वसूली का विरोध हो रहा है।
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‘एफसीआइ की लेबर 50 किलो के गेहंू का प्रति कट्टा एक रुपए ‘डाला’ लेती है। मना करने पर ट्रक ड्राइवर को परेशान किया जाता है। आज तो हम सबको दफ्तर से भी बाहर निकाल दिया।’
- राजेश पंवार, प्रबंधक, राजस्थान राज्य नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम जोधपुर
‘हम भी एफसीआई मजूदरों के ‘डाला’ लेने से परेशान हैं।’
- आनंद राठौड़, प्रबंधक, राजस्थान राज्य नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम उदयपुर
‘मेरी डीएसओ से बात हुई थी। हमने पिछले महीने ही ‘डाला’ बंद कर दिया था। वैसे मेरे सामने कभी किसी मजदूर ने डाला नहीं लिया है। यह नियमानुसार गलत है। ’
जय सिंह सारण, डिपो प्रबंधक, भारतीय खाद्य निगम भगत की कोठी