
जोधपुर. जोधपुर में वर्ष 1931 में स्थापित जोधपुर फ्लाइंग क्लब में सदस्यों को उड़ान भरने के साथ साथ एरियल पिकनिक का लुत्फ उठाने का अवसर मिलता था। इसके अलावा जोधपुर फ्लाइंग क्लब की ओर से एरियल पिकनिक के कारण मारवाड़ के दर्शनीय स्थलों का विकास होने लगा और सैलानियों का भी आकर्षित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। जोधपुर फ्लाइंग क्लब की ओर से कई बार हवाई जहाज को उतारने की भी प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी। क्लब की ओर से आकाश में नए करतब करना भी सिखाया जाता था। महाराजा उम्मेदसिंह की ओर से स्थापित क्लब में 1936 तक क्लब के 39 सदस्य बने थे। उस वर्ष सदस्यों ने 683 घंटे व 30 मिनट की उड़ाने भरी थी। महाराजा उम्मेदसिंह की ओर से उनकी विमान सेवाओं और विस्तार विकास के कारण ब्रिटिश सरकार ने 23 जून 1931 को उन्हें वायुसेना में एयर कमोडोर तथा 1945-46 में एयर वाइस मार्शल का पद प्रदान किया। वर्ष 1941 तक जोधपुर एयर ट्रेनिंग सेंटर सिविल नंबर 2 एलिमेंटरी फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल बन गया था।