
पत्रिका एक्सक्लूसिव
जोधपुर.दोस्ती आम है लेकिन एे दोस्त, दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से। मशहूर शाइर हफीज होशियारपुरी का यह शेर दोस्ती और दोस्तों पर सटीक बैठता है। एक और शाइर ने कहा है-बरसों की दोस्ती भी ताल्लुक न बन सकी,दोनों के दरम्यान बड़ा रखरखाव था। जबकि दोस्ती ( friendship ) का मतलब है एक खुशनुमा एहसास और टाइमलैस फ्रेंडशिप। इसके उलट आज के जमाने में अच्छे दोस्त मिलना बड़ा मुश्किल है। क्यों कि किसी के लंबे समय तक साथ रहने पर दोस्ती का गुमान होता है। पहले पहल हर हंस कर बोलने वाला हर शख्स दोस्त लगता है और वह अपनी खुशमिजाजी से इम्प्रैशन भी जमा लेता है, लेकिन जब बात इमोशन्स, फीलिंग्स और सेंटीमेंट्स की आती है तो उसका एक खुरदरा रूप सामने होता है। एेसे में लोगों के लिए यह तय करना मुश्किल होता है कि वह दोस्त है या नहीं। दोस्ती के लिए अक्सर एक जुमला बार-बार कहा जाता है कि दोस्त वह होता है जो वक्त पर काम आए। अगर दोस्तों को इस परिभाषा की कसौटी पर कसें तो कई दोस्त ( FRIENDS ) खरे नहीं उतर पाते। एेसा अक्सर होता है कि जब कोई मुसीबत में होता है तो दोस्त कहते हैं कि मैं बिजी हूं इसलिए आ नहीं सकता। वहीं कुछ दोस्त एेसे होते हैं कि वे चाहे कितने भी बिजी हों, मगर दोस्त के लिए या तो वक्त स्पेयर रखते हैं या वक्त चुरा लेते हैं और वह भी नहीं होता तो टाइम उधार ले लेते हैं। उनका मकसद यही होता है कि दोस्त ने याद किया है तो उसे वक्त देना ही चाहिए। तभी तो मशहूर शाइर राहत इंदौरी ने कहा है दोस्ती जब किसी से की जाए, दुश्मनों से भी राय ली जाए। फ्रेंडशिप डे ( friendship day ) के मद्देनजर पत्रिका ने पेज थ्री सोसाइटी ( page 3 society ) से जुड़े चंद एेसे जोधपुराइट्स फ्रेंड्स ( jodhpurites friends ) तलाश किए जो एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते और लोग उनकी दोस्ती की मिसाल देते हैं :
समझ लेते हैं बात
जोधपुर के बिजनेसमैन ललित अंचलिया और आर्किटेक्ट राजेश बोहरा में चालीस साल से दोस्ती है। एक ही स्कूल में पढ़े। वे साथ में मूवी देखते हैं। जब तक आपस में एक दूसरे से मिल नहीं लेेते, उन्हें चैन नहीं मिलता। उनकी खास बात यह है कि वे बिना कहे या कम बात कर के भी एक दूसरे की बात समझ लेते हैं।
एलोरा भंडारी और प्रीति टाटिया
जोधपुर में रोटरी क्लब संस्कार की प्रेसीडेंट एलोरा भंडारी और बिजनेस वूमन प्रीति टाटिया के बीच बहुत अच्छी अंडरस्टैंडिंग और स्ट्रॉन्ग बॉण्डिंग है। वे हर महीने मिलती हैं और मोबाइल पर भी घंटों बात करती हैं। उनकी फ्रेंडशिप की खास बात यह है कि वे सुख- दुख की बात आपस में शेयर जरूर करती हैं।
एक दूसरे से मिले बिना नहीं रहते
शहर की मधु जैन और रीटा कानूंगो होम मेकर्स हैं। उनके बीच सन 1975 से यानी बचपन से दोस्ती है। वे एक दूसरे से मिले बिना नहीं रहते। अगर चाय पीना है तो दोनों को एक दूसरे के साथ ही पीएंगे। उनकी दोस्ती की खास बात यह है कि उनमें कभी अनबन नहीं हुई।