
जोधपुर।
कोरोना महामारी के दौरान अनलॉक के बाद नवरात्रि से शुरू हुए त्यौहारी सीजन से निर्यात उद्योग पटरी आने लगा है। दीपावली त्यौहार पर देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश व महालक्ष्मी माता की प्रतिमाएं निर्यात हुई। दीपावली की सीजन में इन देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की विदेश में डिमाण्ड बढ़ जाती है, इसलिए इस बार कोविड के बावजूद गणेश-लक्ष्मी विदेश पधारे। विभिन्न धातुओं से उकेरी गई इन प्रतिमाओं में भगवान गणेश व लक्ष्मी की विभिन्न मुद्राएं झलकती है तथा इनकी कीमत 4 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक होती है। इनके अलावा भगवान श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध, शिव-पार्वती, भगवान महावीर आदि की भी प्रतिमाएं खूब एक्सपोर्ट होती है । निर्यातकों के अनुसार, गणेश-लक्ष्मी सहित अन्य प्रतिमाएं निर्यात की गई लेकिन पिछले वर्षो की तुलना में इस बार कम प्रतिमाएं निर्यात हुई। हर वर्ष शहर से एक्सपोर्ट होने वाली प्रतिमाओं की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपए तक होती है, इस बार यह निर्यात यह आंकड़ा नहीं छू पाया।
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गोरे भी पूजने लगी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं
अप्रवासी भारतीयों के साथ गोरों को भी भारतीय देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भाने लगी है । भगवान गणेश के प्रति विदेशी खरीदारों के क्रेज का आलम यह है कि इन मूर्तियों को विदेशी न केवल पूजते है बल्कि घर के विभिन्न महत्वपूर्ण जगहों पर विराजमान करते है । बायर्स का मानना है कि इन मूर्तियों की वजह से उनके घर में शंाति और सुकून का माहौल रहता है।
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इस समय कोविड के कारण जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग को थोड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का निर्यात तुलनात्मक रूप से कम हुआ है। कंटेनर्स की कमी भी इसका एक कारण है।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन