जोधपुर

Gavar Mata’s Gold Jewelery – इस मेले में 15 किलो सोने के गहनों से गवर माता का शृंगार, गहनों की देखें सूची…

Gavar Mata's Gold Jewelery - जोधपुर की स्थापना के साथ ही शुरू हुआ धींगा गवर का आयोजन- 16 दिन पूजन के बाद होती है विदाई, रातभर चलता है मेला - सुनारों की घाटी की गवर प्रतिमा का नख से शिख तक शृंगार
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Apr 19, 2022
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Gavar Mata's Gold Jewelery - 16 दिन आस्था और परम्परा के साथ गवर माता का पूजन और अंतिम दिन अब माता की विदाई की वेला आती है तो हमारे शहर में सबसे अदभुत मेला भरता है। परकोटा शहर की गली-सड़कों पर सिर्फ महिलाओं का राज होता है। पुरूष दिख भी जाए तो उसे डंडे की फटकार भी महिलाएं ही लगाई है। धींगा गवर के इस आयोजन के लिए शहर का हर मोहल्ला तैयार होता है। अपणायत ऐसी कि महिला अभद्रता या अन्य कोई आपराधिक घटनाएं तक नहीं होती।

563 साल पुरानी परंपरा
धींगा गवर का इतिहास उतना ही पुराना है जितना जोधपुर की स्थापना। माना जाता है कि राज परिवार से इस पूजन की परंपरा शुरू हुई थी। पिछले 500 साल से भी ज्यादा समय से यह पूजा चली आ रही है। मान्यता है कि मां पार्वती ने जब दूसरा जन्म लिया तो वे धींगा गवर के रूप में आई थी।

16 का है विशेष योग
यह पूजन 16 दिन यह चलता है। इस पूजन में एक धागे की पूजा होती है। धींगा गवर पूजन में तीजणियां कच्चे सूत के सोलह धागों को कुमकुम से लाल करती हैं। इसमें 16 गांठ लगाई जाती है और इसे हाथ में बांधती हैं। यह हमारे जीवन के 16 संस्कार से जुड़ा है।

पुरुषों पर इसलिए चलता है डंडा
कुछ वर्ष पहले तक पुरुष धींगा गवर के दर्शन नहीं करते थे। मान्यता है जो भी पुरुष धींगा गवर के दर्शन कर लेता था वो जिंदा नहीं बचता था। इसलिए तीजणियां हाथ में छड़ी लेकर चलती थीं और आधी रात के बाद निकला करती थीं। तीजणियां छड़ी बजाती थीं, जिससे पुरुष सावधान हो जाएं और पुरुष वहां से ना निकलें। कुछ समय बाद एक और मान्यता प्रचलित हुई। इसके अनुसार जिस कुंवारे पुरुष पर तीजणियों की छड़ी पड़ती, उसका विवाह जल्द हो जाता, तब से कुंवारे लड़के इस मेले में छड़ी खाने आते हैं।

विधवा महिलाएं भी करती हैं पूजा
धींगा गवर का पूजन अगले जन्म की कामना के लिए होता है, इसलिए इसे सुहागिनों के साथ कुंवारी और विधवा महिलाएं भी करती हैं।

एक नजर में धींगा गवर मेला
- 2 साल अंतराल बाद आयोजित हो रहा धींगा गवर मेला
- 17 से अधिक जगहों पर विराजित होगी गवर प्रतिमा 1 क्विंटल से अधिक स्वर्ण
आभूषणों से लकदक होती है प्रतिमाएं
- 15 किलो स्वर्ण आभूषण से सजती है सुनारों की घाटी की गवर प्रतिमा
- 4 बजे भोर में होती है गवर की भोळावणी
- 1 लाख से अधिक महिलाएं व दर्शक होते है शामिल
- 25 से अधिक जगहों पर होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम व स्वागत
- 101 किलो मोई की प्रसादी वितरित होगी सिटी पुलिस चाचा की गली में

गवर शृंगार गहनों की सूची
गवर शृंगार में मुकुट, रखड़ी सेट, शीश फूल, नथ, तीमणियां, रामनवमी, चंदन हार, मोतियों की रामनवमी, हथफूल, पुणची, गजरा, चूडिय़ां, पाटला, गोखरू, मंगलसूत्र, बाजुबंद, रत्नजडि़त तिलक, कंगन, हथफूल, नेकलेस, बजरकंठी सहित करीब 14 से 15 किलो नए डिजाइन के स्वर्ण आभूषणों का शृंगार के लिए प्रयोग किया गया। इनमें गवर प्रतिमा के शीश पर हीरे से निर्मित छोटे हार की कीमत 35 लाख से ज्यादा है।

Published on:
19 Apr 2022 03:49 pm