
जोधपुर . सरकारी स्कूलों की हालत पहले से खराब है। विशेषकर प्रारंभिक शिक्षा की स्कूलों में कक्षाओं व विद्यार्थियों के अनुपात शिक्षक नहीं है। एेसे में परीक्षा के दिन नजदीक आ गए हैं। दूसरी ओर शिक्षा विभाग के शिक्षक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक प्रतिनियुक्तियों पर इधर-उधर सेवाएं दे रहे हैं। इन हालात में विद्यार्थियों का अध्ययन कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इनमें कई शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे हुए हैं। इनको कई बार विभाग भी पत्र लिख चुका है, लेकिन वे अभी तक अपने मूल कार्यस्थल पर नहीं पहुंचे। एक सरकारी रिकार्ड अनुसार पूरे जोधपुर संभाग में २०० शिक्षक एवं कर्मचारी अन्यत्र जगह अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ज्यादातर सिफारिशी शिक्षक व कर्मचारी
प्रतिनियुक्ति पर चल रहे शिक्षक, वरिष्ठ लिपिक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। ये सभी सिफारिशी हैं। इनमें कई शिक्षक उपखंड अधिकारी कार्यालय, तहसील कार्यालय, डीईओ ऑफिस, बीईईओ कार्यालय कार्यालय निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी क्षेत्र, जिला निर्वाचन अधिकारी, चुनाव शाखा सहित अन्य जगहों पर लगे हुए हैं। हालांकि इनमें कई दूसरी शैक्षणिक स्कूलों में भी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी को हटाना और लाना शिक्षाधिकारियों के हाथ में नहीं होता है, क्योंकि अमूमन राजनीतिक अप्रोच वाले हैं। ज्यादातर शिक्षक व कर्मचारी दूरदराज गांवों में लगे हुए हैं, जो प्रतिनियुक्ति के जरिए घर के नजदीक स्थानों पर सेवाएं दे रहे हैं।
कार्यमुक्त के लिए लिखा गया, लेकिन नहीं आ रहे
एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार पाली जिले में एेसे कई शिक्षक शिक्षक हैं, जो विकास अधिकारी व उपखंड अधिकारी सहित कई जगहों पर सेवाएं दे रहे हैं, जिन्हें कार्यमुक्ति के लिए लिखा गया, लेकिन वे कोई न कोई अप्रोच लगा पसंदीदा जगहों पर जमे हुए हैं। हालांकि संभाग के कुछ जिलों में शून्य प्रतिनियुक्तियां भी दशाई जा रही है।
इनका कहना
ज्यादातर प्रतिनियुक्तियां राज्य सरकार व सक्षम स्तर पर की गई है। इंटर्नशिप के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था को सुचारू करने के लिए शिक्षक लगाए जा रहे हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो।
- धर्मेन्द्रकुमार जोशी, डीईओ प्राशि प्रथम