
जोधपुर . सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के समय से पहले घर जाने का एक मामला सामने आया है। संभाग के सबसे बड़े शिक्षाधिकारी को कुछ शिक्षिकाएं स्कूल की छुट्टी से पहले बस का इंतजार करती मिली। इस पर उपनिदेशक प्रारंभिक ने डीईओ-बीईईओ को पत्र भेज कार्रवाई के लिए कहा है। हालांकि इस तरह के नजारे गांवों की स्कूलों में आम है। उपनिदेशक प्रारंभिक जोधपुर मंडल श्याम सुंदर सोलंकी ने कुछ दिन पहले लूणी स्कूलों का निरीक्षण किया था। इस दौरान कुछ अध्यापिकाएं विद्यालय समय में ही बस का इंतजार करती पाई गई। यह अध्यापिकाएं राजकीय प्राथमिक विद्यालय भाकर की ढाणी गेलावास लूणी और राजकीय प्राथमिक विद्यालय धतरवालों की ढाणी लूनी की थी।
इस पर श्यामसुंदर सोलंकी ने जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा को पत्र लिख कार्रवाई के लिए कहा। इसकी एक प्रति बीईईओ लूनी को भेजी है। डीईओ को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा है। इसी क्षेत्र की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गेलावास के निरीक्षण में एक अध्यापक मई २००९ से निरंतर अनुपस्थित पाया गया। जिस पर भी डीईओ को कार्रवाई के लिए लिखा गया। विद्यालय परिसर में उन्हें कुछ अनुपयोगी व जर्जर भवन मिले, जिसको भी डीडी प्रारंभिक ने ध्वस्त करवाने के निर्देश दिए। यहां डीडी को अधिकतर छात्र अनुपस्थित मिले, जिस पर उन्होंने अभिभावकों से संपर्क कर विद्यार्थियों को नियमित स्कूल भेजने को कहा। विद्यालय में ग्रीन बोर्ड भी नहीं मिला। साथ ही नसीहत दी गई कि विज्ञान किट का प्रयोग करें। साथ ही साबुन से हाथ धुलाने की बात कही गई।
गांवों में समस्या
ज्यादातर गांवों में शिक्षक स्कूल समय से पहले छोड़ देते हैं तथा बाहर आकर बस का इंतजार करते है। एेसा इसलिए होता है कि कई गांवों में शिक्षक-शिक्षिकाओं को स्कूल छुट्टी के बाद तुरंत बस नहीं मिल पाती। जो शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए बड़ी समस्या भी है। हालांकि इसका निवारण समय से पहले स्कूल छोडऩा भी नहीं है।
इनका कहना है
सभी को निर्देशित किया जा रहा है कि समय पर आए और समय पर जाएं।
- श्यामसुंदर सोलंकी, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, जोधपुर मंडल